ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
प्रदेश ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल की ओर से जारी प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव कामरेड अरविन्द राज स्वरूप ने कहा कि प्रदेश में दलितों के विरुद्ध अत्याचारों में निरंतर वृद्धि है । सबसे हालिया वीभत्स घटना फैजाबाद अयोध्या थाना अंतर्गत हुई जिसके बाबत वामपंथी पार्टियों ने मिलकर जिला प्रशासन को एक ज्ञापन भी दिया है।
वामपंथी पार्टियों के नेता गण पीड़िता के घर भी गए और उसके परिजनों से बात की , संवेदनाएं व्यक्त की और परिवार को ढाढस बंधाया ।
मृतका के 60 वर्षीय पिता भोरई ने बताया कि 28 जनवरी को गांव में चल रहे भागवत कथा में उसकी पुत्री गई थी जहां से न लौटने पर परिवार के सदस्यों ने काफी खोजबीन की। तब कहीं पता न लगने पर 30 जनवरी को उक्त घटना की अयोध्या कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। जनवरी 31 को गांव से कुछ दूरी पर बने आईटीआई के पास फटे हुए कपड़े और आईटीआई परिसर में बने बाथरूम में खून के धब्बे मिले।फरवरी 01 को वहीं से कुछ दूरी पर नाले में युवती का क्षत-विक्षत नग्न अवस्था में शव बरामद हुआ। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार शव देखकर ऐसा लग रहा था कि दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी गई थी।पीड़ित परिवार भूमिहीन है और रहने के लिए दो कमरे का प्रधानमंत्री आवास बना है। पिता की छ: संतानों में मृतका सबसे छोटी पुत्री थी। पुत्री के साथ हुई वीभत्स घटना को लेकर पूरा परिवार सदमें में है और घटना में शामिल सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहा है।
वामपंथी नेताओं ने आस-पास के लोगों से भी बातचीत कर तथ्यों की जानकारी ली। घटना को लेकर लोगों में जहां एक तरफ डर व्याप्त है वहीं दूसरी तरफ पुलिस की कार्य प्रणाली को लेकर आक्रोश भी है।
बयान में कहा गया कि अगर समय रहते पुलिस ने त्वरित कार्यवाही की होती तो इस प्रकार की जघन्यतम घटना न हुई होती।कहा गया कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलायी जाए, लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों को दंडित किया जाए व पीड़ित परिवार को कम से कम एक करोड रुपए की आर्थिक सहायता दी जाए।
बयान में कहा गया की डबल इंजन की भारतीय जनता पार्टी की श्री योगी की सरकार सामाजिक कुरीतियों से लड़ती नहीं है बल्कि मनुस्मृति के आधार पर सामाजिक गैर बराबरी को पनपाती है। इसीलिए उत्तर प्रदेश में आए दिन दलितों पर होने वाले अत्याचारों की खबर छपती रहती है। यह कम्युनिस्ट पार्टी ही है जो इमानदारी से समाज में दलितों की सामाजिक बराबरी और हिस्सेदारी के लिए सबसे अधिक संघर्ष करती है