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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि, उच्च पदों पर बैठे लोग बेखौफ होकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं, जिनके कारण देश में आर्थिक अशांति पैदा हुई है. न्यायालय ने लोक सेवा में लगे अधिकारियों के भ्रष्टाचार की निंदा की. अदालत ने कहा कि, सरकार और राजनीतिक दलों के उंचे पदों पर बैठे लोग भ्रष्ट तत्व हैं और ऐसे तत्व किराए के हत्यारों से भी बड़ी समस्या है.
जस्टिस जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें होने की निंदा की. बेंच ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार के बारे में लोगों की धारणा का एक अंश भी सच है, तो यह सच से बहुत दूर नहीं है कि उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा बेखौफ होकर किए जा रहे भ्रष्टाचार के कारण ही इस देश में आर्थिक अशांति पैदा हुई है.
पीठ ने 3 मार्च को अपने आदेश में कहा, “यदि किसी से पूछा जाए कि हमारे समाज की समृद्धि की ओर प्रगति को रोकने वाला एकमात्र कारक कौन सा है, तो निस्संदेह वह भ्रष्टाचार है. यदि विकासशील देश में समाज को कानून और व्यवस्था के लिए किराए के हत्यारों से भी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो वह सरकार और राजनीतिक दलों के उच्च पदों पर बैठे भ्रष्ट तत्वों से है.”
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार में ऑडिट इंस्पेक्टर देविंदर कुमार बंसल को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए ये तीखी टिप्पणियां कीं. बंसल पर एक ग्राम पंचायत द्वारा किए गए विकास कार्यों के ऑडिट के बदले रिश्वत मांगने का आरोप था.
इस साल जनवरी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत पटियाला के विजिलेंस ब्यूरो के पुलिस स्टेशन में अपीलकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत के लिए उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.