श्री दिगम्बर जैन महासमिति के तत्वावधान में अलीगढ़ में होगा धर्म संसद का आयोजन

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उप संपादक संजय मिश्रा

अलीगढ़ अहिंसा विश्व भारती और विश्व शांति केंद्र के संस्थापक विख्यात प्रखर वक्ता जैन अमेरिकी राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित आचार्य डॉ.लोकेश मुनि का मंगलायतन यूनिवर्सिटी में पुस्तक विमोचन के अवसर पर श्री दिगम्बर जैन महासमिति के प्रांतीय मंत्री राजीव जैन, प्रांतीय संयोजक मुनेश जैन आर.एम. डब्लू ने आशीर्वाद प्राप्त किया एवं अलीगढ़ नगर में जैन समाज को आशीर्वाद प्रदान करने हेतु एवं विश्व शांति हेतु धर्म संसद के कार्यक्रम में पधारने का निवेदन किया जिसको उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर अप्रैल के प्रथम सप्ताह में कार्यक्रम के आयोजन में उपस्थित होने के लिए आश्वस्त किया।महासमिति सकल जैन समाज के सहयोग से एक वृहद कार्यक्रम के आयोजन की तैयारी में जुट गई है।वहीं समिति के महामंत्री राजीव जैन बताया कि बहुमुखी विचारक,लेखक,कवि एवं समाज सुधारक पूज्य आचार्य डॉ.लोकेश मुनि पिछले 33 वर्षों से राष्ट्रीय चरित्र निर्माण, मानवीय मूल्यों के विकास तथा समाज में अहिंसा,शांति एवं परस्पर सहयोग की स्थापना के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इतना ही नहीं परम पूज्य आचार्य जी को भारत सरकार द्वारा विज्ञान भवन में आयोजित एक प्रतिष्ठित समारोह में ‘राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार 2010’ से सम्मानित किया गया साथ ही आचार्य श्री को लंदन संसद में ‘शांति के राजदूत’ से सम्मानित किया जा चुका है और विश्व शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें यूनाइटेड पीस फेडरेशन द्वारा 2014 में संयुक्त राष्ट्र केंद्र में ‘शांति के राजदूत पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।2006 में माननीया श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने डॉ.लोकेश को अहिंसा, शांति और समाज में आपसी विश्वास की स्थापना में उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन के प्रसिद्ध ‘नैतिक सम्मान’ से सम्मानित किया।इसके अलावा अहिंसा,शांति और आपसी सहयोग के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें दो बार मिलपिटास के मेयर के रूप में ‘कीज़ ऑफ़ मिलपिटास सिटी’ से सम्मानित किया जा चुका है।आचार्य डॉ.लोकेश मुनि को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, अमेरिका में भारत गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।परम पूज्य आचार्य डॉ.लोकेश मुनि ध्यान,योग और शांति शिक्षा के क्षेत्र में पारंगत हैं और उनका योगदान लोकप्रिय ‘शांति शिक्षा’ की विधा है जो प्राचीन ध्यान-योग और वर्तमान वैज्ञानिक अनुसंधान का संयोजन है।यह मनुष्य में पशु प्रवृत्ति को समाप्त करता है और मानवीय और आध्यात्मिक मूल्यों को जागृत करता है।आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने विश्व धर्म संसद,संयुक्त राष्ट्र संघ और लंदन संसद जैसे कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों से भाषण देकर भारतीय संस्कृति को गौरवान्वित किया है।इस अवसर पर मंगलायतन यूनिवर्सिटी के उप कुलपति पीएस.दशोरा भी उपस्थित रहे

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