फर्जी पासपोर्ट-वीजा वालों की अब खैर नहीं, सात साल जेल और दस लाख जुर्माना का प्रवाधान

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

प्रधान संपादक

नईदिल्ली : अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को वापस भेजे जाने का मामला काफी गरमाया था. तब पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि डंकी रूट से लोगों को विदेश ले जाने वाले एजेंटों पर नकेल कसने की आवश्यकता है. अब इस दिशा में भारत सरकार ने बड़ी तैयारी की है. भारत में प्रवेश करने, रहने या छोड़ने के लिए फर्जी पासपोर्ट या वीजा का उपयोग करते हुए पकड़े जाने वाले व्यक्ति को सात साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना पड़ सकता है.

11 मार्च को लोकसभा में पेश विधेयक के अनुसार, “जो कोई भी जानबूझकर जाली या धोखाधड़ी से प्राप्त पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज या वीजा का उपयोग या आपूर्ति भारत में प्रवेश करने या भारत में रहने या भारत से बाहर जाने के लिए करता है, उसे कम से कम दो वर्ष की कैद की सजा दी जाएगी, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही उसे कम से कम एक लाख रुपये और अधिकतम दस लाख रुपये तक के जुर्माने का भी भुगतान करना होगा.”

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लाया गया यह कानून अनिवार्य करता है कि होटल, विश्वविद्यालय, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और नर्सिंग होम विदेशियों के बारे में जानकारी दें ताकि उन लोगों पर नजर रखने में मदद मिल सके जो अपने वीजा की अवधि से अधिक समय तक भारत में रहते हैं. सभी अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइनों और जहाजों को भारत में किसी बंदरगाह या स्थान पर यात्री और चालक दल की सूची, ऐसे विमान, जहाज या परिवहन के अन्य साधन पर सवार यात्रियों और चालक दल की अग्रिम सूचना भी प्रस्तुत करनी होगी.
इसमें यह भी कहा गया है कि कोई भी विदेशी व्यक्ति यदि वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज के बिना भारत के किसी क्षेत्र में प्रवेश करता है, जिसमें कानून के प्रावधानों या उसके अनुसरण में दिए गए किसी नियम या आदेश का उल्लंघन करते हुए ऐसे प्रवेश के लिए आवश्यक वीजा भी शामिल है, तो उसे पांच वर्ष तक के कारावास और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है.

आव्रजन एवं विदेशी विधेयक, 2025 विदेशियों और आव्रजन से संबंधित सभी मामलों को विनियमित करने के लिए एक व्यापक कानून है. वर्तमान में चार अधिनियमों के माध्यम से प्रशासित किया जाता है. पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम-1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम-1939, विदेशी अधिनियम-1946 और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम-2000. इन सभी कानूनों को अब निरस्त करने का प्रस्ताव है. आव्रजन एवं विदेशी विधेयक, 2025 में निरस्त किए जाने वाले चार अधिनियमों के कई नियमों को शामिल किया गया है.
एक अधिकारी ने कहा कि यह विधेयक भारत में अवैध प्रवास की समस्या से निपटने में मदद करेगा तथा भारत में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने वाले विदेशियों की गतिविधियों पर नजर रखने में सहायता करेगा. जबकि विदेशियों को सभी श्रेणियों के भारतीय वीज़ा विदेश स्थित भारतीय मिशनों या केन्द्रों द्वारा भौतिक या स्टीकर रूप में प्रदान किए जा सकते हैं, आव्रजन ब्यूरो (BoI) 167 देशों के लोगों को सात श्रेणियों के तहत इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा प्रदान करता है.
मौजूदा कानूनों के अनुसार, 180 दिनों से अधिक छात्र, चिकित्सा, अनुसंधान, रोजगार, मिशनरी और परियोजना वीजा पर आने वाले सभी विदेशियों को आगमन के 14 दिनों के भीतर उस स्थान पर अधिकार क्षेत्र वाले विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) या संबंधित विदेशी पंजीकरण अधिकारी (एफआरओ) के पास पंजीकरण कराना आवश्यक है. पाकिस्तानी नागरिकों को अपने आगमन के 24 घंटे के भीतर पंजीकरण कराना आवश्यक है.

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