ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
ब्यूरो चीफ हेमराज मौर्या
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थानांतरण नीति को लेकर उठा कानूनी मुद्दा तय करने के लिए मामला वृहद पीठ को संदर्भित कर दिया है, जिसमें तय होना है कि पति पत्नी दोनों सरकारी नौकरी कर रहे हैं और नीति है कि दोनों को एक स्थान या नजदीक में तैनात किया जाए, इसे लागू करने के लिए बाध्य किया जा सकता है और क्या तबादला नीति के विपरीत आदेश की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए.
यह आदेश न्यायमूर्ति जे.जे मुनीर ने ललितपुर निवासी वरुण जैन की याचिका पर दिया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अजय कुमार श्रीवास्तव के मामले को भी वृहद पीठ को भेजा गया था, जिसमें इसी तरह के मुद्दे थे. इसलिए, इस याचिका को भी उसी के साथ संबद्ध किया जाएगा.
याची की ओर से अधिवक्ता एमए सिद्दीकी का कहना है कि याची की नियुक्ति तकनीकी सहायक तृतीय श्रेणी कर्मचारी के पद पर मृदा संरक्षण कार्यालय जालौन (उरई) में की गई थी. प्रदेश के 8 जिलों में शुरू एक प्रोजेक्ट के लिए याची का तबादला सिद्धार्थनगर कर दिया गया. कोविड 19 के दौरान याची के पिता की मृत्यु हो गई. उसकी पत्नी ललितपुर में अध्यापिका है. घर में वृद्ध मां की देखभाल के लिए याची ने ललितपुर या नजदीक के जिले में तबादला करने की अर्जी दी, जिसे अपर जिला प्रशासन कृषि निदेशालय ने 29 नवंबर 2023 को निरस्त कर दिया. इसी याचिका में चुनौती दी गई है.
याची का कहना है कि निदेशालय का आदेश सरकार की तबादला नीति का खुला उल्लघंन है. अधिकारियों को इस नीति के विपरीत आदेश करने का अधिकार नहीं है. ललितपुर व सिद्धार्थनगर की दूरी 700 किमी है. आवागमन के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है. यात्रा में 22 से 24 घंटे लगते हैं. तबादला नीति है कि पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी करते हों तो एक स्टेशन पर या नजदीक तैनाती की जाए.
ऐसे में अपर निदेशक का आदेश तबादला निति के विपरीत है, इसे रद्द किया जाना चाहिए और याची का ललितपुर या नजदीक के जिले में तबादला किया जाना चाहिए. कोर्ट ने इसी मुद्दे को तय करने के लिए प्रकरण वृहद पीठ को संदर्भित किया है.ठ करेगी विचार_
ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
ब्यूरो चीफ हेमराज मौर्या
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थानांतरण नीति को लेकर उठा कानूनी मुद्दा तय करने के लिए मामला वृहद पीठ को संदर्भित कर दिया है, जिसमें तय होना है कि पति पत्नी दोनों सरकारी नौकरी कर रहे हैं और नीति है कि दोनों को एक स्थान या नजदीक में तैनात किया जाए, इसे लागू करने के लिए बाध्य किया जा सकता है और क्या तबादला नीति के विपरीत आदेश की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए.
यह आदेश न्यायमूर्ति जे.जे मुनीर ने ललितपुर निवासी वरुण जैन की याचिका पर दिया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अजय कुमार श्रीवास्तव के मामले को भी वृहद पीठ को भेजा गया था, जिसमें इसी तरह के मुद्दे थे. इसलिए, इस याचिका को भी उसी के साथ संबद्ध किया जाएगा.
याची की ओर से अधिवक्ता एमए सिद्दीकी का कहना है कि याची की नियुक्ति तकनीकी सहायक तृतीय श्रेणी कर्मचारी के पद पर मृदा संरक्षण कार्यालय जालौन (उरई) में की गई थी. प्रदेश के 8 जिलों में शुरू एक प्रोजेक्ट के लिए याची का तबादला सिद्धार्थनगर कर दिया गया. कोविड 19 के दौरान याची के पिता की मृत्यु हो गई. उसकी पत्नी ललितपुर में अध्यापिका है. घर में वृद्ध मां की देखभाल के लिए याची ने ललितपुर या नजदीक के जिले में तबादला करने की अर्जी दी, जिसे अपर जिला प्रशासन कृषि निदेशालय ने 29 नवंबर 2023 को निरस्त कर दिया. इसी याचिका में चुनौती दी गई है.
याची का कहना है कि निदेशालय का आदेश सरकार की तबादला नीति का खुला उल्लघंन है. अधिकारियों को इस नीति के विपरीत आदेश करने का अधिकार नहीं है. ललितपुर व सिद्धार्थनगर की दूरी 700 किमी है. आवागमन के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है. यात्रा में 22 से 24 घंटे लगते हैं. तबादला नीति है कि पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी करते हों तो एक स्टेशन पर या नजदीक तैनाती की जाए.
ऐसे में अपर निदेशक का आदेश तबादला निति के विपरीत है, इसे रद्द किया जाना चाहिए और याची का ललितपुर या नजदीक के जिले में तबादला किया जाना चाहिए. कोर्ट ने इसी मुद्दे को तय करने के लिए प्रकरण वृहद पीठ को संदर्भित किया है.