सहकारी गन्ना समिति में करोड़ों का घपला; लेखाकार पर 130 वाउचर लगाकर खातों में रुपये भेजने का आरोप, अब होगी रिकवरी

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

सह संपादक कपिल गुप्ता

हापुड़ : जिले की सहकारी गन्ना समिति में करोड़ों रुपये के घपले का मामला सामने आया है करोड़ों रुपये के घपले का आरोप लेखाकार पर लगा है. आरोप है कि लेखाकार ने समिति के करोड़ों रुपये अपने और रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर कर दिए. आरोप है कि बैंक में अलग-अलग नाम के 130 वाउचर लगाकर 8 खातों में करीब पांच करोड़ रुपया भेजा गया है. घपले में अन्य कर्मचारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना जा रहा है. पूरे मामले की जांच जिलाधिकारी की ओर से कराई जा रही है.
‘लेखाकार के नहीं आने पर हुआ शक’ : सहकारी गन्ना समिति के चेयरमैन कुणाल चौधरी ने बताया कि समिति के लेखाकार लेखा-जोखा और बैंक में ट्रांजैक्शन करते थे. किसानों को जो पेमेंट होता था, वही बैंक में वाउचर भेजा करते थे. वह जब 25 तारीख से समिति में नहीं आए तो हमें शक हुआ. उनका आरोप है कि किसानों की पेमेंट मिल से आई थी जो किसानों तक नहीं पहुंच पाई.
जांच में फर्जी वाउचर लगाकर ट्रांजैक्शन की बात आई सामने : उन्होंने बताया कि इस मामले की जानकारी करने पर बैंक में बताया गया कि खाते में बैलेंस कम है. हमें जानकारी थी कि खाते में पर्याप्त बैलेंस है. इसकी जांच कराई गई. उनका आरोप है कि लेखाकार ने फर्जी वाउचर लगाकर काफी ट्रांजैक्शन अपने खातों में कर रखा था. उन्होंने बताया कि यह करीब 5 करोड़ रुपये का घोटाला है. यह समिति का पैसा है. इस मामले में जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि जो भी आरोपी होंगे उन पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. इस मामले में जांच कमेटी बना दी गई है.
रिश्तेदारों के खातों में रकम भेजने का आरोप : जिलाधिकारी अभिषेक पांडे ने बताया कि सहकारी गन्ना समिति में एक बाबू जिनके पास लेखाकार का भी अतिरिक्त चार्ज था, इनके द्वारा वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है. आरोप है कि समिति के खातों से पैसों को अपने रिश्तेदारों के खातों में डलवाया गया. प्रथम दृष्टता इसमें लेखाकार द्वारा समिति का पैसा ट्रांसफर करना पाया गया है. उन्होंने बताया कि अभी तक गणना के हिसाब से 3 से 4 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया है.
उन्होंने बताया कि इसमें समिति के सचिव, अन्य कर्मचारी और बैंक के कर्मचारी की भूमिका बेहद संदिग्ध है. जांच के बाद सभी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही सचिव और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि पैसे की रिकवरी के लिए रिकवरी सर्टिफिकेट भी जारी किया जा रहा है. आरोपी लेखाकार की गुमशुदगी की रिपोर्ट समिति के सचिव द्वारा कराई गई है.

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