बस चले शराब की दुकानों का, तो 24 घंटा बेचे शराब, बस ख्याल आ जाता है निरीक्षकों की कटिंग का, कहीं वो ना बढ़ जाए

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी

लखनऊ संवाददाता
राजधानी लखनऊ के यह हालात हैं की आबकारी के नियमों को पालन करने वाली दुकान को ढूंढना पड़ेगा। ऐसी दुकान जो सभी मानकों के अनुरूप चल रही हो, यदि अगर आप ढूंढ कर निकाल भी लेते हैं, तो उसमें भी कोई ना कोई कमी निकल ही आएगी। ऐसा ही है राजधानी लखनऊ के आबकारी विभाग के नेतृत्व में चल नहीं शराब की दुकान के हाल। किसी भी शराब की दुकान के मानकों और नियमों में आपको पूरी तरीके से सहमति नहीं दिखाई देगी। कोई पहले से नियम को तोड़ता आ रहा है, तो कोई बाद में तोड़ना शुरू करता है।
जिला आबकारी अधिकारी से लेकर निरीक्षक तक अगर आप यह सोचते हैं कि आपकी शिकायतों का निस्तारण हो जाए, तो आप गलत सोचते हैं। उसका कारण सिर्फ इतना है कि आबकारी निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्र में शराब की दुकानों पर लगाम कसने में नाकाम भी हैं और कहीं-कहीं अपनी कमाई को लेकर ज्यादा जिम्मेदार हैं। ऐसा इसलिए कह सकते हैं क्योंकि अगर शराब की दुकान मानकों और नियमों के विपरीत चल रही है तो निरीक्षकों की जेब भर रही है। यदि किसी की शिकायत निरीक्षकों को प्राप्त होती है या जिला आबकारी अधिकारी द्वारा शिकायत का निवारण के लिए भेजी जाती है, तो बस फर्क इतना पड़ेगा कि शराब की दुकान के संचालक को निरीक्षकों का ख्याल थोड़ा ज्यादा रखना पड़ेगा। ऐसा कह सकते हैं कि घूम फिर करके आबकारी विभाग में शिकायतें एडजस्ट हो ही जाती जाता हैं , लेकिन शिकायतकर्ता वहीं का वहीं रहता है।
हमारी सरकार भी राजस्व को लेकर के बाद ज्यादा जागरुक है। ऐसा इसलिए कह सकते हैं कि शराब की दुकानों को लेकर जगह-जगह विरोध हो रहे हैं आबकारी निरीक्षक से लेकर जिला आबकारी अधिकारी और आबकारी आयुक्त तक देख रहे हैं, पर इन मामलों में प्रशासन और सरकार द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं। इसका मतलब साफ है कि लोगों की परेशानियों से कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क सिर्फ इतना पड़ता है कि शराब की दुकानों से आने वाला राजस्व काम नहीं होना चाहिए और बढ़ाने के लिए और दुकान दे दी गई हैं। जगह-जगह दुकान देंगे दे दी गई हैं यहां तक के राष्ट्र मार्ग को भी नहीं छोड़ा हैं, जो कि मानक के विपरीत है, पर सरकार और प्रशासन को इस मामले में कुछ नहीं कहना, क्योंकि राजस्व का मामला है। ऐसे में आम जनता सिर्फ शिकायत करके आबकारी कर्मियों की कमाई ही बढ़ा सकती है, तो कहा जा सकता है की राजधानी लखनऊ के आबकारी विभाग की कमाई बहुत मजबूत स्थिति में चल रही है। उसके दो कारण हैं पहले शराब की दुकानों से आने वाले राजस्व से और दूसरा शिकायतों के दौर से.

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