यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
जबलपुर : पास्को एक्ट के तहत 20 साल के कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन अपील दायर की गई. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस देवनारायण मिश्रा की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़ता का यौन शोषण नहीं हुआ. इसके बाद युगलपीठ ने सजायाफ्ता की सजा 20 साल से घटाकर 5 साल किये जाने का आदेश दिया.
पीड़िता ने जिला न्यायालय में ये बयान दिया
जिला अनूपपुर निवासी हरि कीर्तन शाह ने पास्को सहित अन्य धाराओं के तहत अधिकतम 20 साल की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाई. अपील में कहा गया कि उसने घटना के पूर्व ही थाना प्रभारी से शिकायत की थी कि उसे एससी-एसटी एक्ट में झूठा फंसाया जा सकता है. सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पीड़िता ने न्यायालय के समक्ष परीक्षण के दौरान कहा था कि उसके साथ छेड़छाड़ हुई. लेकिन शोषण नहीं हुआ.
हाई कोर्ट में यौन उत्पीड़न का तर्क खारिज
सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि पीड़िता की आयु लगभग 09 वर्ष है. वह यौन उत्पीड़न की शिकार है. आरोपी को किसी प्रकार की रियायत नहीं की जाए. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि ट्रायल कोर्ट में पूछताछ करने पर पीड़िता ने बताया था कि उसके अंगों से केवल छेड़छाड़ हुई. मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के निजी अंगों पर कोई चोट के निशान नहीं मिले. इसी आधार पर सजा को संशोधित किया गया.