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सह संपादक कपिल गुप्ता
मुरैना: जिला अदालत ने पंचायत विकास अधिकारी शिवचरन शाक्य की हत्या मामले में 8 अभियुक्तों को आजीवन कारावास सहित अर्थदंड की सजा सुनाई है. वहीं, न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में तीन अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया. जबकि मामले में एक आरोपी अभी भी फरार चल रहा है. पीड़ित की ओर से पैरवी उप संचालक अजाक अब्दुल नसीम और विशेष लोक अभियोजक इंद्रेश कुमार प्रधान ने की.
गाड़ी रोककर की थी फायरिंग
मुरैना जिला कोर्ट के जनसंपर्क अधिकारी अभियोजन इन्द्रेश कुमार प्रधान ने कहा, “पूरा मामला 7 अगस्त 2019 का है. सुभाष सिकरवार ने नंदपुरा गांव में हो रहे खरंजा निर्माण की शिकायत की थी. मुख्य आरोपी कल्लू उर्फ रामकिशोर की पत्नी उस समय पंचायत की सरपंच थी. खरंजी निर्माण का ठेका उसी के पास था. शिकायत मिलने पर इसकी जांच करने पंचायत विकास अधिकारी शिवचरन शाक्य और समन्वयक जगन्नाथ सिकरवार गए थे. जांच करने के बाद शिवचरन शाक्य बोलेरो जीप से शिकायतकर्ता सुभाष सिकरवार और उनके पुत्र सौरभ के साथ जौरा लौट रहे थे. इसी दौरान शाम 6 बजे स्कार्पियो और एक बोलेरो जीप ने उनके वाहन को आगे-पिछे से घेर लिया था.”
हमले में अधिकारी की हुई थी मौत
दोनों वाहन में सवार रामराज, कल्लू उर्फ रामकिशोर और प्रदीप सिकरवार सहित शिवराज सिकरवार ने बंदूक और कट्टों से फायरिंग की थी. गोली लगने से पंचायत विकास अधिकारी शिवचरन शाक्य की मौत हो गई थी, जबकि हमले में सुभाष और जगन्नाथ जख्मी हो गए थे. सुभाष सिकरवार की शिकायत पर पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या का प्रयास सहित एट्रोसिटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया था.
इसी मामले में न्यायालय ने 8 आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है. जिनमें कल्लू उर्फ रामकिशोर, शिवराज, राजेश, रामराज, मुकेश, प्रदीप और सुरेन्द्र और रवि शामिल हैं. जबकि साक्ष्य के अभाव में 3 आरोपी दोषमुक्त कर दिए गए. वहीं, मामले में एक आरोपी अब तक फरार चल रहा है.