प्रियंका को उतारना ‘गेम चेंजर प्लान’! आधी आबादी को साधने के साथ कार्यकर्ताओं के लिए ‘आत्मविश्वास’ का बूस्टर डोज

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी

“`बिहार में प्रियंका गांधी की ‘वोटर पद यात्रा’ कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जिसका उद्देश्य राज्य की आधी आबादी को आकर्षित करना है। इंदिरा गांधी की छवि और पुनौरा धाम की यात्रा के माध्यम से धार्मिक महिलाओं तक पहुंचना, कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार कर रहा है।“`

पटना वोटर अधिकार यात्रा में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को बिहार की धरती पर उतारना कांग्रेस के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है। महागठबंधन के रणनीतिकार और कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता यूं ही नहीं प्रियंका गांधी को बिहार की चुनावी सरजमी पर उतारने की रणनीति नहीं बनाई है। यह एक सोची समझी रणनीति है जिसका मकसद राज्य की आधी आबादी पर फोकस्ड है।

प्रियंका में इंदिरा गांधी की झलक

प्रियंका गांधी का जब राजनीति में प्रवेश हुआ तो उनकी बोलने की शैली,जनता के प्रति आकर्षण का भाव, हाथ हिलाना और जनता के साथ ताली बजा कर उनका उत्साह वर्धन करने जैसी भंगिमा के बाद उनमें न केवल कांग्रेस कार्यकर्ता बल्कि जनता के बीच उनमें आयरन लेडी इंदिरा गांधी की झलक देखने लगी। महागठबंधन के रणनीतिकार प्रियंका गांधी की उसी छवि को परोस कर आधी आबादी के बीच अपनी पैठ बैठाना चाहती है। सुपौल की यात्रा में प्रियंका गांधी के प्रति जनता का रिस्पांस और जनता के प्रति प्रियंका का रिस्पांस से इसे समझा जा सकता है।

मिथिलांचल में प्रियंका गांधी की यात्रा

पुनौरा धाम का अपना धार्मिक महत्व हो सकता है पर चुनाव के ऐन मौके पर मिथिलांचल की यात्रा में शामिल करना और पुनौरा धाम में पूजा अर्चना का कार्यक्रम रखने के पीछे भी कही न कही धार्मिक महिलाओं के प्रति कांग्रेस को स्थापित करने का मकसद भी रहा हो। यह अलग बात है कि प्रियंका गांधी का कितना प्रभाव पड़ेगा पर उनकी यह यात्रा प्रभावहीन तो नहीं होने जा रही है।

कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता में उत्साह

गौर करें तो इधर कांग्रेस के राजनीतिक स्वभाव में दब्बूपन से मुक्ति का संघर्ष दिख रहा है है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बदले तेवर का तभी पता चल गया जब राहुल गांधी ने पत्रकारों के लगातार पूछे जाने पर भी यह नहीं कहा कि अगला सीएम तेजस्वी यादव होंगे।

वहीं राहुल गांधी के आक्रामक राजनीति के तहत वोटर अधिकार यात्रा और वोट चोर के नारों ने कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं को इस छटपटाहट से मुक्ति दिल दी कि कांग्रेस की भूमिका पिछलग्गू पार्टी सी नहीं रही। राहुल गांधी को बिहार की जनता ने ड्राइविंग सीट पर देखा। इस बार प्रियंका गांधी को वोटर अधिकार यात्रा में उतारकर कांग्रेस की जमीनी कार्यकर्ता के विश्वास को और भी पक्का कर गया।

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