ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
रायबरेली।
जनपद रायबरेली से राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के जिला महासचिव क्रांतिकारी पत्रकार एवं जीत वेलफेयर फाउंडेशन,उ0प्र0 संस्था के अध्यक्ष जितेंद्र सविता ने लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले कलमकार बंधुओं के साथ आए दिन हो रहे उत्पीड़न की ख़बरों को लेकर चिंता व्यक्त की और पत्रकारों के मामले में शासन–प्रशासन की ओर से लचर कार्यशैली पर भी निशाना साधा और कहा कि आखिरकार पत्रकारों का जो नैतिक कर्तव्य है यदि वह खबर को अपने बैनर में प्रकाशित कर रहा है तो उस खबर से संबंधित आरोपित व्यक्ति जिस प्रकार एक कलमकार को रोकने का षड्यंत्र रचता है, उसे डराने का प्रयास करता है और नाकाम होने पर देख लेने की धमकी के साथ साथ जान से मारने की धमकी देने से बाज नहीं आते यह बेहद चिन्ता जनक विषय है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो क्या पत्रकार स्वतंत्र तरीके से खबरों को आम जनमानस के सामने प्रकशित कर सकेगा। यूं तो समय-समय पर सरकार के द्वारा पत्रकार हितों की कई बातें सामने निकल कर आती है,परंतु जिम्मेदारों पर उनका कोई असर नहीं दिखता। आखिरकार सरकार कब तक पत्रकार सुरक्षा कानून पर ध्यान देगी,यह सोचनी विषय है। यह मैं इसलिए कह रहा हूं की प्रदेष भर से ऐसे कई मामले आए दिन सामने आते हैं जहां पर पत्रकारों के साथ ख़बर को लेकर उत्पीड़न होता दिखता है और इतना ही नहीं उन पर झूठे मुकदमों से लेकर जान से मारने की भी घटनाएं सुनाई देती है और कई घटनाएं तो ऐसी भी सामने आई है जहां पर पत्रकार की निर्मम हत्या कर दी गई, ऐसे में सरकार आखिरकार पत्रकार हितों पर क्यों संज्ञान नहीं ले रही। इसलिए सरकार पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पत्रकार नित देश हित,समाज हित एवं सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को अपनी लेखनी से प्रचार–प्रसार कर जन-जन तक पहुंचाने में अग्रिम भूमिका निभाते है बदले में सरकार से सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी सुरक्षा की मांग उठाते है, क्या सरकार पत्रकारों को लेकर जरा भी संवेदनशील नहीं है, और यदि हैं तो कृपया जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाते हुए पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू कर,पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।