ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
प्रदेश ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी
महाकुंभ में मची भगदड़ पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्ततेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है।
महाकुंभ में हुई भगदड़ की घटना बहुत ही दुखद है इसे हर कोई आहत और निस्तब्ध है।
जिस तरह से इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरने का प्रयास करने में मीडिया से लेकर साधु संत सहित सारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है वह संदेहास्पद लग रहा है।
इसके पूर्व में भी योगी आदित्यनाथ की कई बार घेरेबंदी हो चुकी है, लेकिन हर बार उनका कद उनका व्यक्तित्व उनकी लोकप्रियता उनसे दिली तौर पर सियासी बैर रखने वालों के हाथ तंग कर देती है।
इस समय देश का नेशनल मीडिया चैनल TV9 महाकुंभ में घायलों में मृतकों के आंकड़े गिनाते हुए सरकार के मुखिया को जबरदस्त तरीके से घेरने का प्रयास कर रहा है।
बिल्कुल देश की मीडिया में यह चेतना होनी चाहिए कि वह सरकार से सवाल करें और सभी मुद्दों पर खुलकर सवाल करे।
दूसरी तरफ इस चैनल की निष्पक्षता पर यहां भी संदेह होता है, कि देश में महंगाई बेरोजगारी सेना में अग्निवीर निजीकरण जैसे मसलों पर इसने आज तक कभी केंद्र सरकार से क्यों सवाल नहीं किया?
इस चैनल का क्या देश के अनेकों टीवी मीडिया चैनल पर जनता के सवाल अनदेखी करने का आरोप लगता ही रहता है।
महाकुंभ 2025 प्रयागराज में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित हुआ है,
जिसके लिए सरकार के मुखिया के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की कमियां नहीं रहने दी।
एक ऐसा विराट आयोजन महाकुंभ का जिसमें पक्ष विपक्ष सभी ने राजनीति से ऊपर उठकर नेताओं आम लोगों ने धर्म की इस विहंगमता को आत्मसात किया,
लेकिन लोकल लेबल पर व्यवस्था करना वहां के स्थानीय प्रशासन का काम था, वहां पर गड़बड़ियां हुई है, जिसको लेकर जांच कमेटी अपना काम कर रहीहै।
कुछ लोग इसकी आड़ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिनका कद इस महाकुंभ के आयोजन से भारत की धरा की सीमाओं को चीरते हुए दिग्गानंतर में विश्व पटेल पर हिंदुत्व के शिखर व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हुआ है, उसने कुछ चिन्हित लोगों की नींद हराम कर दी है।
योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक राजनीतिक हाइब्रिड शीत युद्ध इस घटना की आड़ में छेड़ दिया गया है।
उत्तर प्रदेश जिसका अपना आत्मगौरव है आत्मसम्मान है स्वाभिमान है वह किसी की इशारे पर स्थापित कठपुतली के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है।
इस तरह का कार्य करने वालों के मंसूबे कम से कम उत्तर प्रदेश में सफल होते अभी तक तो नहीं नजर आ रहे हैं।