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संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी
लखनऊ, संवाददाता
राजधानी लखनऊ के चिनहट क्षेत्र से लेकर तिवारीगंज तक यातायात पुलिस लखनऊ की लापरवाही और सुस्ती पन की चर्चा तो रोजाना होती ही है, साथ ही यातायात पुलिस कर्मियों की मिलीभगत से चौराहों और तिराहों पर खड़े बैटरी रिक्शा, ऑटो और डग्गामार वाहनों व वहां से गुजरने वाले डग्गामार और अवैध वाहनों पर भी चर्चाएं गरम हैं।
वैसे तो फैजाबाद रोड को देख रहे टीआई वेंकटेश नाकाम हैं अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में। यातायात पुलिस कर्मियों की बात कही जाए तो उनकी उपस्थिति सुबह और शाम को देखी जा सकती है, पर दिन के समय और जाम के वक्त नदारद देखेंगे। रोज़ाना चिनहट क्षेत्र का कमता हो, या चिनहट तिराहा हो, मटियारी चौराहा हो, या बीबीडी चौराहा हो, या तिवारीगंज चौराहा हो, यातायात प्रभावित होने पर यातायात पुलिस सड़कों पर नदारद दिखती है, पर रहती है चौकी के अंदर। ऐसे में चौराहों पर खड़े हो रहे बैटरी रिक्शा, ऑटो रिक्शा और डग्गामार वाहनों के चलते जाम लग जाते हैं, पर ये बगैर यातायात पुलिस की मिलीभगत से नहीं खड़े हो सकते। अच्छी खासी वसूली यहां यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस की हो ही जाती है।
कमता पर रोजाना लगने वाला जाम यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस की नाकामी को दर्शाता है, वहीं चिनहट तिराहा और मटियारी चौराहा पर सड़कों के किनारे खड़े हो रहे बैटरी रिक्शा ऑटो यातायात पुलिस की मिलीभगत को दर्शाता है। बात करें बीबीडी चौराहा की तो क्राउन माल के सिक्योरिटी ही नज़र आती है अपने माल के गेट के आसपास के निगरानी करते हुए, यहां यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस लुकाछिपी का खेल खेलती नजर आती है और जब बात करें तिवारीगंज चौराहे की तो यातायात पुलिस तो सिर्फ खानापूर्ति के लिए है और स्थानीय पुलिस तो दिन से शाम तक सीएमएस स्कूल के गेट के बगल बैठ कर मेहमान नवाजी का लुत्फ लेते हुए नज़र आते हैं।
अगर यातायात से संबंधित मामलों के निवारण और निस्तारण की बात कही जाए तो चिनहट से तिवारीगंज तक यातायात पुलिस की मिलीभगत, वसूली, लापरवाही और सुस्ती पन का रोजाना नज़ारा देखा जा सकता है और स्थानीय पुलिस की बात कहें तो बगैर फायदे के हांथ पैर चलाना शान के खिलाफ हो जाएगा। सहायक पुलिस आयुक्त का पैदल गश्त और थाना प्रभारी की उपस्थिति सब बेकार है रोजाना जाम, अवैध तरीके से खड़े हो रहे वाहनों और अवैध वाहनों के चाल चलन के संबंध में।