मजदूर की रूठी किस्मत, घर-बार छोड़ तीस साल से लगातार पन्ना में तलाश रहा हीरा

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

सह संपादक कपिल गुप्ता

पन्ना: मध्य प्रदेश की हीरा नगरी, पन्ना की धरा कब किसको रंक से राजा बना दे ये किसी को नहीं पता. वहीं, कई लोग अपनी किस्मत बदलने के लिए सालों मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती है. जबकि कुछ पर किस्मत इतनी मेहरबान रहती है कि उन्हें चंद दिनों में हीरा मिल जाता है और उनकी किस्मत चमक उठती है. ऐसा ही एक मजदूर परिवार है जो 3 साल से पन्ना में पट्टे पर खदान लेकर हीरे की तलाश कर रहा है लेकिन अभी तक उसको सफलता नहीं मिली है. इसके बावजूद भी उसने अभी उम्मीद नहीं हारी है और कोशिश लगातार जारी है.

3 साल से जारी है हीरे की तलाश

दरअसल, रविद्र तिवारी नामक मजदूर पट्टी हीरा खदान में पट्टा लेकर उथली खदान लगाए हुए हैं. वह पिछले 3 साल से हीरे की तलाश कर रहे हैं और पिछले 3 महीने से ये प्रयास तेज हो गया है. रविंद्र तिवारी ने बताया कि “वो पिछले 3 महीने से लगातार कड़ी मेहनत करके हीरे की तलाश कर रहे हैं. हीरे की तलाश करते हुए 3 साल हो गया है, लेकिन उम्मीद है कि मेहनत बेकार नहीं जाएगी और हीरा मिल जाएगा.” रविंद्र खदान पर छोटी झोपड़ी बनाकर परिवार सहित वहीं रह रहे हैं.

उथली खदानों में हीरा खोजने का प्रोसेस क्या है?

हीरे की उथली खदान के लिए सर्वप्रथम हीरा कार्यालय से पट्टा बनवाना पड़ता है. पट्टा बनवाने के बाद हीरा कार्यालय में नियुक्त हवलदार जमीन निर्धारित करके बताता है कि कहां हीरे की खदान लगा सकते हैं. फिर उस खदान पर लगातार मिट्टी हटाने के बाद कुछ फीट नीचे हीरे का चाल (कंकड) मिलना शुरू हो जाता है. उस चाल को किसी पानी भरे गड्ढे में डालकर धोना होता है फिर उसको छलनी से छानकर जमीन पर फैलाकर उसमें से हीरा खोजना होता है. अगर किस्मत अच्छी रहती है तो हीरा मिल जाता है नहीं तो ये प्रक्रिया कई दिनों, महीनों या फिर सालों तक चल सकती है.

तीनसाल बाद अभी भी जिंदा है उम्मीद

मजदूर रविंद्र को उम्मीद है कि उसे हीरा मिल जाएगा. इसी उम्मीद से पिछले 3 साल से प्रतिदिन मेहनत कर रहे हैं. वह छतरपुर जिले के बमीठा के रहने वाले हैं. पटी खदान में झोपड़ी बनाकर बीवी बच्चों के साथ रह रहे हैं. वहीं पर खुद मजदूरी करते हैं और प्रतिदिन सुबह उठकर कंकड में हीरे की तलाश करते हैं. पिछले 3 महीने से मेहनत तेज कर दी है. देखना है रविंद्र की किस्मत कब खुलती है और उनके हाथ नायाब बेशकीमती पन्ना का हीरा कब लगता है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा.

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