एक सौ अट्ठाइस वर्षीय योग गुरु शिवानंद का हुआ अंतिम संस्कार, पांच शिष्यों ने दी मुखाग्नि

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

ब्यूरो चीफ अरुण प्रताप सिंह

वाराणसी : 128 साल के योग गुरु शिवानंद महाराज का शनिवार को निधन हो गया था. 2 दिन बाद सोमवार को उनका अंतिम संस्कार हरिश्चंद्र घाट पर किया गया. परम शिष्य संजय ने उनको मुखाग्नि दी. हालांकि शिष्य उनके भूसमाधि की मांग कर रहे थे, प्रशासन ने अनुमति नहीं दी. इसके वजह से अंतिम संस्कार में देरी हुई.
गली बाबा के नाम पर रखने का ऐलानः बंगाली समाज के रीति रिवाज से पद्मश्री बाबा शिवानंद बाबा का पहले पूजन किया गया, फिर उन्हें मुखाग्नि दी गई. आश्रम से जुड़े 5 सदस्यों ने बाबा को मुखाग्नि दी. इसमें दो महिलाएं भी शामिल रहीं. हीरामन विश्वाश, संजय सरवजना, पुरुषोत्तम भट्टाचार्य, मामोनी दीदी, सुशांत,सरमिला लंदन से पहुंचे थे. वहीं, घाट पर मौजूद नगर निगम के पार्षद और निगम कार्य समिति के सदस्य अक्षयवर कुमार सिंह ने उस गली का नाम शिवानंद बाबा के नाम पर रखने का ऐलान किया, जिस गली में वह रहते थे.
स्वामी शिवानंद का कहना था कि जीवन में नियम और संयम का होना बहुत जरूरी है. वह रोज नियम से तड़के 3 बजे उठ जाते थे. दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद एक घंटा टहलते थे. इसके बाद एक घंटा योगासन करते थे. स्वामी शिवानंद सर्वांगासन करते थे. वह कहते थे कि इससे थायराइड नहीं होगा. इसके बाद पवन मुक्तासन करते थे. इससे पेट और गैस की समस्या नहीं होती. भोजन करने के बाद वज्रासन करते थे, इससे खाना आसानी से पच जाता है.
स्वामी शिवानंद दोपहर में भोजन ग्रहण करते थे. उनका भोजन बिना तेल-नमक वाला होता था. इसमें उबली दाल और सब्जियां होती है. शरीर में नमक की पूर्ति के लिए कभी-कभी केवल सेंधा नमक का सेवन कर लेते थे. वे दिन में कभी नहीं सोते. रोज शाम को आठ बजे स्नान करते थे. रात्रि भोजन में जौ से बनी दलिया, आलू का चोखा और उबली सब्जियां लेते थे. उनका कहना था कि अगर हम योग, आहार विहार नियम और संयम को जीवन का अंग बना लें तो जीवन की राह सरल हो जाएगी.

बाबा शिवानंद को 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में जब अपन पद्मश्री लेने पहुंचे थे, उस दौरान वह इतने बुजुर्ग होने के बाद भी एकदम फिट दिखाई दिए थे. वहां पर सम्मान लेने से पहले माथा टेककर सभी को नमन किया था. यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हो गया था. शिवानंद बाबा के आधार कार्ड पर अंकित जन्मतिथि के मुताबिक 8 अगस्त 1896 में उनका जन्म बांग्लादेश के श्री हट्टी जिले में हुआ था. शिष्य डीके विश्वास ने बताया कि शनिवार की रात इलाज के दौरान बाबा निधन हुआ था.
आधा पेट ही करते थे भोजनः शिवानंद महाराज ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि भूख की वजह से उनके माता-पिता का निधन हुआ था. इतनी गरीबी और लाचारी में उन्होंने अपना जीवन व्यतीत किया था. इसकी वजह से वह आधा पेट ही भोजन करते थे. माता-पिता है कि मृत्यु के बाद वह काशी आ गए थे. गुरु ओंकार नंद से दीक्षा ली थी. 1925 में अपने गुरु के आदेश पर वह दुनिया भ्रमण पर निकले थे. 34 सालों तक देश-विदेश घूमते रहे. शिवानंद एक अपार्टमेंट के थर्ड फ्लोर पर एक फ्लैट में रहते थे. प्रतिदिन ऊपर नीचे वह सीढ़ियों से ही आते-जाते थे. 128 वर्षों से वह लगातार योग करके अपने जीवन को बिल्कुल फिट रखने का काम कर रहे थे.
बता दें, शनिवार रात पद्मश्री योग गुरु बाबा शिवानंद का निधन हो गया था. निधन के बाद उनके अनुयायी उनकी समाधि का निर्माण करवाना चाह रहे हैं. जबकि प्रशासन दाह संस्कार करवाना चाह रहा है. वहीं समाधि के लिए दो स्थानों की चर्चा होती रही. इसमें एक शुल्केश्वर महादेव मंदिर के पास और दूसरा बाबा के शिष्य लंदन की डॉ. शर्मिला सिंह के कबीर नगर स्थित कॉलोनी पर उनके फ्लैट में, जो वह दान करने को भी तैयार हैं. इस पर दो दिनों से चर्चा हुई. चर्चा के बाद प्रशासनिक स्तर पर अब अंतिम संस्कार हरिश्चंद्र घाट पर किए जाने पर सहमति बन गई है.
योग गुरु बाबा शिवानंद के शिष्य संजय सर्वजन का कहना है कि अब तक कोई स्थान तय नहीं किया गया है. भू समाधि के लिए प्रशासन से अनुमति की मांग की जा रही है और प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय से भी बात की जा रही है. प्रशासन अंतिम संस्कार के लिए कह रहा है. हम चाहते हैं कि उनकी समाधि बने ताकि उनके भक्त और अनुयायी बाबा के निकट रह सकें. बहरहाल असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, नेपाल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से बाबा के अनुयायी वाराणसी पहुंचे हैं. वहीं इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी अधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन सोमवार शाम 5 से 6 बजे के बीच हरिश्चंद्र घाट पर उनके अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई है, जिस पर भक्तों की भी सहमति बताई जा रही है.

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