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सह संपादक कपिल गुप्ता
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम राहत पर विचार करने के मुद्दे पर 20 मई को सुनवाई करेगा. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर 1995 के पहले के वक्फ कानून के प्रावधानों पर रोक लगाने की किसी भी याचिका पर विचार नहीं करेगी.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह अधिनियम के प्रावधानों पर रोक लगाने वाले अंतरिम आदेश के पक्ष और विपक्ष में पूरे दिन दलीलें सुनेगी.
पीठ ने नए वक्फ कानून की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और केंद्र सरकार का पक्ष रखने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से 19 मई तक अपने लिखित नोट दाखिल करने को कहा. दोनों वरिष्ठ वकीलों ने सुझाव दिया कि सुनवाई अगले सप्ताह के लिए तय की जा सकती है, जिससे न्यायाधीशों को मामले के कागजात देखने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा.
सुनवाई के दौरान एक पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत को बताया किया कि इससे पहले उन्होंने वक्फ अधिनियम 1995 के प्रावधानों को चुनौती दी थी. जैन ने कहा कि नई याचिका में उनके मुवक्किलों ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी है और उनके मुवक्किल वक्फ अधिनियम 1995 के कुछ प्रावधानों से भी चिंतित हैं. उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि उन्हें दलीलें पेश करने के लिए 30 मिनट का समय दिया जाए.
पीठ ने जैन से पूछा, आपकी शिकायत क्या है? जैन ने जवाब दिया कि वक्फ न्यायाधिकरण, जो असंवैधानिक है, अभी भी मौजूद है और कई अन्य धाराएं हैं जो कठोर हैं और वे अभी भी कानून में मौजूद हैं.
सीजेआई गवई ने पूछा, “वे कब से अस्तित्व में हैं? जैन ने कहा कि 1995 से और 2025 में भी. सीजेआई कहा, “यदि वे 1995 से अस्तित्व में हैं, और उन्हें चुनौती नहीं दी गई है… और यदि उन्हें चुनौती दी गई थी तो कब?”
जैन ने कहा कि 1995 के अधिनियम को पहले भी चुनौती दी गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें उच्च न्यायालय में भेजने को कहा था. उन्होंने कहा, “हमने 140 याचिकाएं दायर की हैं जो विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित हैं और अब हमने वर्तमान रिट याचिका दायर की है, जो एक नया मामला है.”
सीजेआई गवई ने कहा कि अदालत 1995 के अधिनियम को 2025 में चुनौती देने की अनुमति कैसे दे सकती है. पीठ ने कहा कि जब अदालत 20 मई को मामले की सुनवाई करेगी तो वह 1995 के पहले के वक्फ कानून के प्रावधानों पर रोक लगाने की किसी भी याचिका पर विचार नहीं करेगी.
सीजेआई ने कहा, “हम 1995 के अधिनियम के किसी भी प्रावधान पर रोक लगाने के किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं करेंगे; हम यह स्पष्ट कर रहे हैं. सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति 2025 के संशोधन को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है और कोई व्यक्ति सिर्फ 1995 के अधिनियम को चुनौती देना चाहता है, इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी.”