आतंक के मददगार न बनें आईएमएफ जैसे वैश्विक संस्थान – डॉ. राजेश्वर सिंह

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी

आई एम एफ द्वारा पकिस्तान को ऋण, अप्रत्यक्ष रूप से आतंक वित्तपोषण – डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ जब सहायता राशि से रोटी नहीं, बारूद खरीदी जाने लगे, तो दुनिया को अपनी अंतरात्मा पर पुनः विचार करना चाहिए। IMF द्वारा पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर के ऋण पैकेज को स्वीकृति देना, जिसमें से 2.4 अरब डॉलर पहले ही जारी किए जा चुके हैं, को लेकर भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे न केवल आर्थिक रूप से गलत निर्णय बताया, बल्कि भूराजनीतिक रूप से भी घातक करार दिया।

डॉ. सिंह ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास वित्तीय अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार और आतंक को संरक्षण देने से भरा पड़ा है। ऐसे देश को वैश्विक संस्थानों द्वारा बार-बार राहत देना यह प्रश्न खड़ा करता है कि क्या हम सुधारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं या अतिवाद को पोषित कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि IMF ने 50 शर्तों के साथ यह ऋण मंज़ूर किया है, जिनमें 11 नई शर्तें भी शामिल हैं, लेकिन पाकिस्तान की विफलताओं का इतिहास बताता है कि वह इन शर्तों को या तो नजरअंदाज करता है या फिर तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करता है। संसद से बजट पारित कराना या बिजली पर अधिभार लगाना ये सतही कदम हैं, जो गहरे भ्रष्ट तंत्र को नहीं बदल सकते।

यह सिर्फ आर्थिक भूल नहीं, बल्कि रणनीतिक असावधानी है सरोजनीनगर विधायक ने स्पष्ट किया। इस धनराशि का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की विशाल सेना और उसके माध्यम से भारत विरोधी आतंक संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद तक पहुंच सकता है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि भारत ने इस ऋण को समर्थन नहीं दिया और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे “अप्रत्यक्ष आतंक वित्तपोषण” की संज्ञा दी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पाकिस्तान को FATF ग्रे लिस्ट से हटाया गया है, वह भी नाममात्र प्रयासों के बाद और अब उसे इस प्रकार से पुरस्कृत किया जाना वैश्विक आतंकवाद विरोधी संरचनाओं की विश्वसनीयता को ही कमजोर करता है।

उन्होंने IMF और अन्य वैश्विक संस्थानों से आह्वान किया कि आर्थिक सहायता सशर्त और पारदर्शी होनी चाहिए। जब तक फंड के उपयोग की रीयल-टाइम निगरानी, स्वतंत्र ऑडिटिंग और बाहरी मूल्यांकन नहीं होगा, तब तक इस प्रकार की सहायता दक्षिण एशिया की स्थिरता को खतरे में डालती रहेगी। डॉ. सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की अपील की और कहा कि लोकतंत्रों, वैश्विक संगठनों और जिम्मेदार राष्ट्रों को एकजुट होकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी संस्था चाहे वह IMF हो या कोई और आतंकवाद की अप्रत्यक्ष सहयोगी न बन सके।

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