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संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी
लखनऊ। नगर निगम ने शहर में अवैध पशुपालन और सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की। नगर आयुक्त महोदय के निर्देश और अपर नगर आयुक्त महोदय के आदेश पर पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के नेतृत्व में सोमवार को गोमती नगर विस्तार स्थित थाना क्षेत्र में जी-20 रोड पर जनेश्वर मिश्र पार्क के पास चल रही अवैध डेरियों पर कार्रवाई की गई।
इस अभियान में नगर निगम की प्रवर्तन टीम और स्थानीय पुलिस बल ने संयुक्त रूप से भाग लिया। मौके पर कुल 15 भैंस और 1 गाय पकड़ी गईं, जिन्हें ठाकुरगंज स्थित कांजी हाउस में भेजा गया। इन पशुओं को नियमानुसार जुर्माना भरने के बाद ही छोड़ा जाएगा। इस कार्रवाई से नगर निगम को लगभग 3,25,000 रुपये की अनुमानित आय होने की संभावना है।
नगर निगम को इस क्षेत्र से लगातार अवैध डेरी संचालन और सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं। इसकी जानकारी स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी और आईजीआरएस के माध्यम से भी कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। बताया गया कि डेरी संचालकों द्वारा गोबर और अन्य अपशिष्ट का उचित प्रबंधन न होने से क्षेत्र में गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा था।
नगर निगम की ओर से पूर्व में डेरी संचालकों को नोटिस जारी कर डेरी हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इस पर कोई असर नहीं पड़ा। उल्टा, इन लोगों ने अपने पशुओं को खुला छोड़कर राहगीरों के लिए बाधा उत्पन्न की और कई बार दुर्घटनाओं का कारण बने। उल्लेखनीय है कि जी-20 रोड एक महत्वपूर्ण वीवीआईपी मार्ग है, जहां पशुओं का खुला घूमना सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया था।
नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लखनऊ नगर निगम की अनुमति के बिना शहरी क्षेत्र में डेरी संचालन पूरी तरह अवैध है। निगम द्वारा शहरी क्षेत्र में अधिकतम दो गाय पालने की अनुमति दी जाती है, वह भी लाइसेंस प्राप्त करने के बाद। भैंस को अपदूषणकारी पशु मानते हुए नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत इसकी शहरी क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती।
इस अभियान में पशु कल्याण विभाग के प्रभारी डॉ. अभिनव वर्मा के साथ श्री शिवेक, रामकुमार, नदीम और श्री मनोज ने सक्रिय भागीदारी निभाई। नगर निगम के इस कड़े कदम से न केवल अवैध डेरी संचालकों को चेतावनी मिली है, बल्कि शहर में स्वच्छता और कानून व्यवस्था को भी सशक्त किया गया है। नगर निगम के अधिकारी भविष्य में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रखने का संकल्प लेकर अवैध अतिक्रमण और पशुपालन पर रोक लगाने हेतु प्रतिबद्ध हैं।