रूस और पश्चिमी देशों के साथ भारत के संतुलित सम्बन्ध पीएम मोदी की बड़ी कूटनीतिक जीत – डॉ. राजेश्वर सिंह

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यूपी लाइव न्यूज 24 लखनऊ

संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

भारत बन सकता है रूस यूक्रेन युद्ध का मध्यस्थ – डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रूस यात्रा को एतिहासिक बताते हुए अपने आधिकारिक एक्स( ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देश की आजादी के बाद भारत के प्रारंभिक वर्षों के दौरान यूएसएसआर के समर्थन के साथ दोनों देश के सात दशक लम्बा मजबूत सद्भावनापूर्ण संबंध है। सामरिक रक्षा साझेदारी का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने आगे जोड़ा कि भारत के 60-70% रक्षा उपकरण रूसी/सोवियत मूल के हैं। दोनों देशों के बीच एस-400 सिस्टम, मिग-29 लड़ाकू विमान, ब्रह्मोस मिसाइलें आदि सामरिक संयुक्त परियोजनाएं: संचालित हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी तेल का आयात महत्वपूर्ण है, वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़कर 65.70 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।

भारत-रूस संबंधों की महत्तता को प्रकाशित करते हुए सरोजनीनगर विधायक ने लिखा कि ऐसे में जब चीन के साथ तनाव है तब उपकरण और पुर्जों की विश्वसनीय आपूर्ति तथा गोपनीय संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के आदान – प्रदान के लिए रूस भारत का सच्चा मित्र और सामरिक सहयोगी है। भारत रूस – यूक्रेन युद्ध की स्थिति में तटस्थ रहते हुए दोनों देशों को बातचीत के माध्यम से मसले को सुलझाने की वकालत करता है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के लिए रूस और पश्चिमी देशों के गठबंधन दोनों के साथ संतुलित सम्बन्ध भी रखता है। भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार वृद्धि का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने आगे लिखा कि 2025 तक 30 बिलियन डॉलर के युद्ध-पूर्व लक्ष्य को पार कर लिया गया। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत – रूसे के बीच व्यापार $65.70 बिलियन का सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है, जिसमें मुख्य रूप से भारत ने तेल, उर्वरक और बहुमूल्य धातुएँ सहित $61.44 बिलियन का आयत किया। भविष्य में प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में सर्वाधिक व्यापार संभावनाएँ हैं।

भारत को रूस से मिल रही रक्षा सहायता को ऐतिहासिक बताते हुए विधायक ने आगे लिखा कि शीत युद्ध के दौरान रूस भारत का मुख्य आपूर्तिकर्ता रहा है, वर्तमान में क्रिटिकल हार्डवेयर के लिए समझौते भी प्रक्रियाधीन हैं। रूस भारत के परमाणु रिएक्टरों और संयुक्त अंतरिक्ष परियोजनाओं में भी सहयोगी है। रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रियायती तेल का महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। रूस को भारत की ओर से राजनयिक समर्थन मिल रहा है, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस के विरोध में वोट करने से परहेज किया गया; शांति और बातचीत की वकालत की। भारत रूस का महत्वपूर्ण तेल आयातक है जो रूस पर प्रतिबंधों के बाद भी रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

भारत-रूस संबंधों के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत – रूस संबंधों को नया आयाम प्रदान किया है, दोनों देशों का लक्ष्य ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत बनाना है, रक्षा और ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करना और व्यापार व निवेश को बढ़ाना है। भारत का लक्ष्य वैश्विक गतिशीलता को संतुलित करते हुए रूस और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाना; यह सुनिश्चित करना कि चीन संबंधों पर प्रभाव न डाले।भारत रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संघर्षों में तटस्थ मध्यस्थ के रूप में भी कार्य कर सकता है।

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