महिलाओं की भागीदारी विशेषाधिकार नहीं, आर्थिक आवश्यकता है” : वैश्विक आंकड़ों से डॉ. सिंह का स्पष्ट संदेश

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी

लखनऊ “मैं तारा शक्ति केंद्र क्यों खोल रहा हूँ, बालिका विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी क्यों स्थापित कर रहा हूँ, हर गांव में बालिका खेल क्लब क्यों बना रहा हूँ, दूरस्थ लतीफ नगर गांव में बालिका डिग्री कॉलेज का निर्माण क्यों करा रहा हूँ, और युवतियों को निःशुल्क डिजिटल प्रशिक्षण क्यों दिला रहा हूँ?” “क्योंकि बेटियों को सशक्त बनाना केवल सामाजिक सुधार नहीं, यह राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया है।”

बुधवार को सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से एक सशक्त, दूरदर्शी और तथ्य-आधारित संदेश साझा करते हुए बताया कि भारत को आगे ले जाने के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण अनिवार्य है। उन्होंने राष्ट्रीय और वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए महिला सशक्तिकरण को आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक प्रगति से सीधे जोड़ा।

*डॉ. सिंह ने महिलाओं के सशक्तिकरण के 5 प्रमुख कारण गिनाए:*
*1. आर्थिक शक्ति का संवर्धन :* McKinsey Global Institute के अनुसार, यदि भारत लैंगिक असमानता को पाटे तो 2025 तक GDP में $770 बिलियन की वृद्धि संभव है। लेकिन World Bank (2024) के अनुसार, आज भी केवल 23% महिलाएं औपचारिक कार्यबल में शामिल हैं।
“महिलाओं की भागीदारी कोई विशेषाधिकार नहीं, यह भारत की आर्थिक अनिवार्यता है।”

*2. शिक्षा और स्वास्थ्य में व्यापक प्रभाव* UNESCO के अनुसार, एक शिक्षित महिला अपने बच्चों को शिक्षित करने की संभावना दो गुना अधिक होती है। जहां महिला साक्षरता दर 70.3% है, वहीं पुरुषों की 84.7%, यह अंतर चिंताजनक है।
“एक महिला को शिक्षित करना, एक पीढ़ी को शिक्षित करना है।”

*3. गरीबी के चक्र को तोड़ना* UN Women India के अनुसार, महिलाएं अपनी आय का 90% परिवार में पुनर्निवेश करती हैं, जिससे ग्रामीण, दलित और आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक बदलाव आता है। “किसी परिवार को गरीबी से बाहर निकालने का सबसे तेज़ तरीका है – उसकी महिला को सशक्त बनाना।”

*4. राजनीतिक भागीदारी और शासन की मजबूती* लोकसभा में आज भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 15% है। लेकिन अध्ययन बताते हैं कि महिला नेता स्वास्थ्य, शिक्षा और जमीनी विकास में अधिक निवेश करती हैं। “जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो समाज सुनता है और आगे बढ़ता है।”

*5. सुरक्षित, सशक्त और संगठित भारत* जहां लैंगिक समानता अधिक है, वहां अपराध दर कम, शैक्षणिक स्तर उच्च, और सामाजिक समरसता मजबूत होती है। “कोई भी राष्ट्र तब तक नहीं उठ सकता, जब तक वह अपनी महिलाओं को ऊपर नहीं उठाता।”

*दृष्टिकोण से क्रियान्वयन तक : सरोजनीनगर में जमीन पर दिख रहा है बदलाव*
डॉ. राजेश्वर सिंह का दृष्टिकोण केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, इसे योजनाओं, बजट और परिणामों के माध्यम से धरातल पर उतारा गया है। उनके नेतृत्व में सरोजिनी नगर में निम्नलिखित उल्लेखनीय कार्य हुए हैं: 1,600 सिलाई मशीनों का वितरण और 160 तारा शक्ति सिलाई केंद्रों की स्थापना, जिससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर बनाया गया। 31 बालिका विद्यालयों में डिजिटल इंटरएक्टिव पैनल तथा 30 महाविद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना, जिससे बेटियों को तकनीकी शिक्षा में बढ़त मिली। 78 गांवों में बालिका युवा क्लबों का गठन, जहां खेल संसाधनों के माध्यम से शारीरिक व मानसिक विकास को बढ़ावा मिला।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने ₹13.54 करोड़ की लागत से लतीफनगर में वर्षों से अधूरा पड़ा बालिका डिग्री कॉलेज पूर्ण करवाकर फिर से चालू कराया गया।सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग के अंतर्गत बालिकाओं की बास्केटबॉल, फुटबॉल आदि खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन, जिससे नेतृत्व और आत्मविश्वास को नई दिशा मिली। ये केवल वादे नहीं, बल्कि प्रमाण हैं कि डॉ. राजेश्वर सिंह का महिला सशक्तिकरण के प्रति संकल्प सिर्फ बातों तक सीमित नहीं है, वे इसे जमीनी हकीकत बना रहे हैं।

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