श्री कृष्ण दत्त एकेडमी वृंदावन में आर्ट एंड क्राफ्ट विभाग में आयोजित की गई “रंग आजादी प्रदर्शनी

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव 24 उत्तर प्रदेश

संपादक प्रवीण सैनी

सरोजिनी नगर वृंदावन योजना में स्थित श्री कृष्णा दत्त एकेडमी में रंग–ए –आजादी आर्ट एंड क्राफ्ट प्रदर्शनी का आयोजन किया गया,मुख्य अतिथि के तौर पर सर्वजन हिताय संरक्षण समिति महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष रीना त्रिपाठी, एसकेडी अकादमी की डायरेक्टर निशा सिंह, सह डायरेक्टर कुसुम बत्रा, प्रशासनिक अधिकारी सुभाष तिवारी और फाइन आर्ट विभाग से लोकेश वर्मा ने फीता काटकर तथा दीप प्रज्वल कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
काकोरी क्रांति के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में, स्वतंत्रता दिवस तथा जन्माष्टमी के विभिन्न रंगों को प्रदर्शनी के माध्यम से देश के विविधता ,प्रकृति के विभिन्न आयामो को रंगों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। स्केचिंग, ऑयल पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग ,फोटोग्राफी तथा कला की अन्य विधाओं के माध्यम से बच्चों ने प्रदर्शनी को प्रकृति से जोड़ा। प्रदर्शनी में सुसज्जित की गई सभी कलाकृतियां बच्चों के द्वारा बनाई गई थी जिसमें फाइन आर्ट की बारीकियो का बखूबी प्रयोग किया गया। समाजसेविका व संस्था की अध्यक्ष रीना त्रिपाठी ने कहा कि श्री कृष्ण दत्त अकादमी का फाइन आर्ट विभाग वाकई काबिले तारीफ है यहां के प्रशिक्षक व बच्चे बहुत ही बारीकियां से जीवन की विविध विधाओं को प्रदर्शित करते हैं जो शिक्षा और प्रशिक्षण की उत्कृष्टता को दिखाता है। अन्य संस्थाओं को इस प्रकार की प्रदर्शनी से सीख लेते हुए अपने यहां भी ऐसी प्रदर्शनियां आयोजित करनी चाहिए।
संस्था की डायरेक्टर निशा सिंह ने कहा कि इस तरह की आयोजित प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चे एक तरफ जहां प्रकृति से जुड़ते हैं वहीं दूसरी तरफ उनके अंदर आत्मविश्वास उत्पन्न होता है वह अपनी बातों को कलाकृतियों में रंगों के इन विभिन्न माध्यमों से आसानी से कह सकते हैं।
सह डायरेक्टर कुसुम बत्रा ने प्रत्येक कलाकृति को देखा और बच्चों से उसकी खूबियों के बारे में पूछा बच्चों ने बनाने की विधि तथा कलाकृतियों की बारीकियां के बारे में समझाया। बत्रा मैडम ने बताया कि इस प्रकार की प्रदर्शनी जहां एक ओर कृष्ण दत्त अकादमी को अन्य कॉलेजों से अलग करती है वहीं फाइन आर्ट विभाग के माध्यम से संस्थान बच्चों को आत्मनिर्भर और स्वरोजगार से जोड़ने की शिक्षा देता है ताकि भविष्य में यह बच्चे स्वाबलंबी बन सके।

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