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संपादक प्रवीण सैनी
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य सरकार के तीन जिलाधिकारियों (डीएम) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन अधिकारियों ने सरकारी आदेशों का पालन करते हुए यादव और मुस्लिम समुदायों को लक्षित किया है, जो संविधान और न्याय के खिलाफ है। अखिलेश यादव ने इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार ने उचित कार्रवाई नहीं की, तो वह कोर्ट जाएंगे।
इस बीच, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने भी इस आदेश की आलोचना करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उन्हें बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन बताया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विवाद के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संयुक्त निदेशक एसएन सिंह को निलंबित किया और आदेश को निरस्त कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई जाति या धर्म के आधार पर नहीं की जाएगी।
इस मामले ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ लिया है, जहां विपक्षी दलों ने सरकार पर भेदभाव और संविधान विरोधी कार्यों का आरोप लगाया है। अब यह देखना होगा कि अदालत इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या सरकार आगे कोई ठोस कार्रवाई करती है।