राजधानी लखनऊ के पॉलिटेक्निक चौराहे के पास खड़ी होनी अवैध टैक्सियों और बैटरी रिक्शा पर टीएसआई कुछ नहीं कर सकते.

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

अवैध टैक्सियों का वर्चस्व बरकरार, यातायात पुलिस भी सहयोग करने में पीछे नहीं

लखनऊ
राजधानी लखनऊ में अवैध टैक्सियां जैसे एर्टिगा आदि पर लगाम कसने में यातायात पुलिस असमर्थ है। यहां तक इस मामले में टीएसआई की जुबान से निकलता है, चौराहा छोड़कर और वीआईपी के लिए यातायात क्लियर करने के अलावा उनके पास और कोई आदेश नहीं है।
*यहां तक जब कारवाही की बात आती है, तो सीधे टीआई के निर्देश और अधिकार क्षेत्र पर सौंप देते हैं….*
आप हैं पॉलिटेक्निक चौराहे के यातायात बूथ के प्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह, जो यातायात बाधित और वाहन अतिक्रमण पर कहते हैं मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है कार्यवाही करना। उनके मुताबिक उनके अधिकार क्षेत्र में है कि पॉलिटेक्निक चौराहे पर वीआईपी मूवमेंट का ख्याल रखना और चौराहे पर दिखाई देना।
ऐसे हालत में यही प्रतीत होता है कि कितने असमर्थ और बेबस हैं कि चौराहे के किनारे खड़े हो रहे बैटरी रिक्शा व अवैध टैक्सियों से बन रहा स्टैंड पर कार्यवाही नहीं कर सकते, या यूं कहें कार्यवाही नहीं करना चाहते।
*हालांकि टीएसआई रविंद्र प्रताप सिंह से अपनी असमर्थता और बेबसी का हवाला अपने पूर्व अनुभव को बतलाते हुए बताया है, कि सन 1996 से यह अवैध गाड़ियों का चलन चल रहा है, जिसे सरकार और प्रशासन रोक नहीं पाया, तो हम क्या रोक पाएंगे….*
बहुत खूब कहा आपने, ऐसे व्यक्ति के मुंह से इन शब्दों का निकलना सीधा और साफतौर पर दर्शाता है कि यातायात पुलिस में ऐसे भी जिम्मेदार व्यक्तियों की हाथ में जिम्मेदारी सौंप गई है, जो जिम्मेदारी के लायक ही नहीं हैं। सिर्फ खानापूर्ति के लिए चौराहे पर मुस्तैद हैं और जब बात करें कार्यवाही करने की, तो सीधे अधिकारियों के आदेशों की बात करते हैं।
वाकई योगी सरकार और प्रशासन से इन्हीं को सवाल पूछना चाहिए, क्योंकि जब यही योगी सरकार और प्रशासन पर इल्ज़ाम लगा रहे हैं, तो शिकायतकर्ता इनसे क्या उम्मीद करेगा…?

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