सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल पहुंचाया मरीज हो गई मौत

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

उप संपादक संजय मिश्रा

कौशाम्बी सरकारी अस्पताल में सुविधा न मिलने से प्रसव के बाद निजी अस्पताल में महिला को लेकर परिवार के लोग पहुंच गए लेकिन निजी अस्पताल में भी महिला की जिंदगी नहीं बच पाई बल्कि डॉक्टरों की लापरवाही के चलते निजी अस्पताल में महिला की मौत हो गई है मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया है आक्रोशित परिवार और रिश्तेदार के लोगों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया है महिला मरीज की मौत के बाद निजी अस्पताल के संचालक सरकारी अस्पताल के डॉक्टर को मौत का जिम्मेदार साबित करने में उतावले हैं तो वहीं सरकारी अस्पताल के डॉक्टर महिला मरीज की मौत के बाद निजी नर्सिंग होम के संचालक को मौत का जिम्मेदार बता रहे हैं दोनों एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं लेकिन कार्यवाही किसी पर नहीं हुई है

जानकारी के मुताबिक रोनी देवी उम्र 30 वर्ष पत्नी विनोद कुमार निवासी मीरापुर थाना पूरामुफ्ती को प्रसव पीड़ा के बाद पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चायल में भर्ती कराया गया था सरकारी अस्पताल में महिला का प्रसव हो गया लेकिन डाक्टर मौजूद नहीं थे प्रसव के बाद महिला को सरकारी अस्पताल में समुचित इलाज नहीं मिल सका और सरकारी अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने महिला को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया लेकिन एंबुलेंस वाले जिला अस्पताल लेकर नहीं गए बल्कि तिल्हापुर के एक निजी अस्पताल में महिला को भर्ती कर दिया और निजी अस्पताल में भी महिला का इलाज नहीं हो सका और निजी अस्पताल की लापरवाही के बाद महिला की दर्दनाक मौत हो गई है यदि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए डॉक्टर मौजूद नहीं रहते उन सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर पर फिर भी कार्यवाही नहीं होती है आखिर जब डॉक्टर सरकारी अस्पताल में मौजूद नहीं है तो मरीज को क्यों भर्ती किया जाता है और गायब रहने वाले डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज करना और उन पर कठोर कार्रवाई करने के लिए क्यों स्वास्थ्य विभाग तैयार नहीं दिखाई पड़ रहा है मरीजों की जिंदगी से सरकारी अस्पताल के डॉक्टर खेल रहे हैं जबकि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने पूर्व जिला अधिकारी के जरिए उच्च न्यायालय में शपथ पत्र भेजा था कि वह निजी प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि 90 प्रतिशत सरकारी डॉक्टर निजी अस्पतालों के संचालन में मस्त दिखाई पड़ रहे हैं जिससे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था चौपट है वहीं निजी अस्पतालों में भी कुशल डॉक्टर नहीं है बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर मरीजों को प्रलोभन दिया जा रहा है जहां मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो रही है लेकिन मरीजों की लगातार हो रही मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी गंभीर नहीं दिखाई पड़ रहे हैं जिससे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं

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