यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
उप संपादक संजय मिश्रा
आगरा: कानून को चकमा देने का हैरान करने वाला मामला थाना न्यू आगरा क्षेत्र से सामने आया है। यहां एक आरोपी ने खुद का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर न केवल खुद को कागजों में ‘मृत’ घोषित करा लिया, बल्कि अदालत में चल रहा मुकदमा भी बंद करा दिया। पूरे 12 साल बाद वही आरोपी सड़क पर स्कूटी दौड़ाते दिखाई दिया, तब जाकर इस सनसनीखेज जालसाजी का खुलासा हुआ।
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी आदि से जुड़ा कूटरचित दस्तावेजों का मामला (वाद संख्या-242/1999) विचाराधीन था। इसमें गांधी नगर निवासी तारा चंद्र शर्मा मुख्य आरोपी था। गिरफ्तारी और गैर-जमानती वारंट से बचने के लिए तारा चंद्र ने वर्ष 2013 में नगर निगम का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। प्रमाण पत्र में उसकी मृत्यु वर्ष 1998 दर्शाई गई थी।
हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने भी बिना गहन सत्यापन किए वर्ष 2013 में आरोपी की मृत्यु की पुष्टि कर दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने मुकदमा समाप्त कर दिया।
मामले में चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब 5 नवंबर 2025 को वादी राजकुमार वर्मा ने गांधी नगर क्षेत्र में तारा चंद्र को स्कूटी चलाते देखा। उन्होंने तत्काल उसकी फोटो ली और आरटीओ कार्यालय से स्कूटी का विवरण निकलवाया।
जांच में सामने आया कि जिसे व्यक्ति 1998 में मृत बताया गया था, उसने अपने ही नाम से जुलाई 2016 में नई स्कूटी खरीदी थी। इतना ही नहीं, वह मोबाइल बैंकिंग का भी नियमित रूप से उपयोग कर रहा था।
वादी द्वारा अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थाना न्यू आगरा पुलिस को जांच के आदेश दिए। उपनिरीक्षक मधुर कुशवाह की जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि तारा चंद्र शर्मा अपने घर पर जीवित पाया गया। आरोपी के बेटे आशुतोष शर्मा ने भी अपने पिता के जीवित होने की बात स्वीकार की।
पुलिस ने आरोपी की वर्तमान फोटो के साथ रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है। अब फर्जी दस्तावेज तैयार कर अदालत को गुमराह करने और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने के मामले में आरोपी पर सख्त कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।