झारखंड रांची इकोनॉमिक सर्वे में खुलासा: प्रति व्यक्ति आय 75,670 रुपये तक पहुंचने के आसार

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

उप संपादक संजय मिश्रा

रांची: झारखंड की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा और अहम बदलाव सामने आया है. बजट सत्र के चौथे दिन वित्त मंत्री द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, राज्य में सर्विसेज सेक्टर ने उद्योग को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ा आर्थिक क्षेत्र बनने का दर्जा हासिल कर लिया है. साल 2011-12 में जहां सर्विसेज का योगदान सकल राज्य मूल्य संवर्धन यानी GSVA में 38.54 फीसदी था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 45.56 फीसदी हो गया है.

प्रति व्यक्ति आय में इजाफे का अनुमान

सर्वे में प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी झारखंड की स्थिति को संतोषजनक बताया गया है. राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के करीब बनी हुई है. साल 2016-17 से यह राष्ट्रीय औसत के लगभग 60 फीसदी के स्तर पर स्थिर है. अनुमान के मुताबिक, स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 2025-26 में 71,994 रुपये और 2026-27 में 75,670 रुपये तक पहुंच सकती है, जो क्रमशः 5.25 फीसदी और 5.18 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है.

GSDP की वृद्धि दर 5.96 फीसदी रहने का अनुमान

सर्वे के मुताबिक, आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 में झारखंड की सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP की वृद्धि दर 5.96 फीसदी रहने का अनुमान है, जो चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 की अनुमानित 6.17 फीसदी की दर से थोड़ी कम है. हालांकि, इससे पहले 2024-25 में राज्य की अर्थव्यवस्था ने 7.02 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी, जो राष्ट्रीय औसत 6.5 फीसदी से भी अधिक रही थी. सर्वे में इसे स्थिर और दीर्घकालिक विकास की ओर बढ़ने का संकेत बताया गया है.

GSVA ग्रोथ में सर्विसेज सेक्टर का योगदान 53.2 फीसदी

सर्वे के मुताबिक, 2024-25 में GSVA ग्रोथ में सर्विसेज सेक्टर का योगदान 53.2 फीसदी रहा, जबकि उद्योग का योगदान 23 फीसदी और कृषि का 16 फीसदी रहा. अनुमान के मुताबिक, सर्विसेज सेक्टर की मजबूती आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है. इसके तहत 2025-26 में सर्विसेज का GSVA 1,37,730 करोड़ रुपये और 2026-27 में 1,48,479 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई गई है.

इस दौरान इसकी हिस्सेदारी कुल GSVA में बढ़कर क्रमशः 46.65 फीसदी और 47.17 फीसदी तक पहुंच सकती है. खास तौर पर वित्तीय सेवाओं में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जहां हाल के वर्षों में ग्रोथ 11 से 19 फीसदी के बीच रही है. वित्तीय सेवाओं का GSVA 2025-26 में 10,837 करोड़ रुपये और 2026-27 में 11,893 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.

गरीबी के मोर्चे पर भी राज्य को बड़ी राहत

सर्वे के अनुसार, झारखंड में बहुआयामी गरीबी 2015-16 में 42.10 फीसदी थी, जो 2019-21 में घटकर 28.81 फीसदी रह गई यानी पांच वर्षों में 13.29 फीसदी अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है. सर्वे में इस सुधार का श्रेय आर्थिक विकास के साथ-साथ सौभाग्य योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी लक्षित सरकारी योजनाओं को दिया गया है, जिनसे बिजली, शौचालय, रसोई गैस और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ी है.

साल दर साल बढ़ रहा है बजट का आकार

सर्वे में बताया गया है कि झारखंड का बजट 2001-02 में 6,007 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,16,892 करोड़ रुपये (वास्तविक) तक पहुंच चुका है, जबकि 2025-26 के लिए 1,45,400 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है. खर्च के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है. योजना मद पर खर्च 2018-19 में 54.7 फीसदी से बढ़कर 2024-25 में 60.7 फीसदी हो गया है, वहीं स्थापना खर्च घटकर 39.3 फीसदी रह गया है. पूंजीगत व्यय 2023-24 में कुल खर्च का 29 फीसदी तक पहुंच गया था, जो संदर्भ अवधि का उच्चतम स्तर रहा, हालांकि 2024-25 में यह घटकर 25.9 फीसदी हो गया.
राजकोषीय घाटा FRBM की 3 फीसदी की सीमा के भीतर
सर्वे के मुताबिक, 2020-21 के कोविड काल को छोड़कर हर साल राजकोषीय घाटा FRBM की 3 फीसदी की सीमा के भीतर रहा है. 2023-24 में यह 1.37 फीसदी रहा और प्राथमिक घाटा लगभग शून्य रहा. वहीं 2024-25 में राजकोषीय घाटा बढ़कर 2.81 फीसदी हो गया, जिसका कारण अधिक पूंजीगत खर्च और कर्ज अदायगी की जिम्मेदारियां रहीं, हालांकि यह अब भी तय सीमा के भीतर है.
अब राज्य की निगाहें 24 फरवरी पर टिकी है, जब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर विधानसभा में वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करेंगे. सर्वे के निष्कर्षों से साफ है कि झारखंड की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पारंपरिक उद्योग और खनन आधारित ढांचे से निकलकर सर्विसेज आधारित विकास की ओर बढ़ रही है.

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