गढ़िया लौहार समुदाय ने महाराणा प्रताप का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया: सुरेश गांधी

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

हिंदू समाज को जागरूक एवं संगठित रहने की जरूरत: अजय शिंगला

पानीपत: 8 मार्च ()
सेक्टर–29, पानीपत में वैदिक परिवार द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन में सनातन संस्कृति, संगठन और इतिहास पर हुआ मंथन

पानीपत। सेक्टर–29 में वैदिक परिवार पानीपत द्वारा एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरा के अनुसार यज्ञ के साथ हुआ। वैदिक परिवार के धर्माचार्य आचार्य संजय शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न करवाया। इस अवसर पर उपस्थित गढ़िया लोहार समाज सहित सभी हिंदू बंधुओं ने यज्ञ में आहुति डालकर धर्म और संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता समाजसेवी सुरेश गांधी रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में सनातन संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और भारत के गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने महान वीर योद्धा महाराणा प्रताप के संघर्ष और स्वाभिमान का उल्लेख करते हुए एक प्रेरणादायक प्रसंग साझा किया।

उन्होंने बताया कि जब मेवाड़ के महाराणा प्रताप का संघर्ष मुगल शासक अकबर से चल रहा था और विशेष रूप से हल्दीघाटी का युद्ध के बाद कठिन परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गई थीं, तब महाराणा प्रताप के साथ अनेक समाजों ने भी त्याग और समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

सुरेश गांधी ने बताया कि उस समय गढ़िया लोहार समुदाय ने महाराणा प्रताप के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए यह संकल्प लिया था कि जब तक मेवाड़ पुनः स्वतंत्र नहीं हो जाता, तब तक वे स्थायी घरों में नहीं बसेंगे और घुमंतू जीवन व्यतीत करेंगे। इसी कारण यह समुदाय बैलगाड़ियों पर अपना जीवन बिताता रहा और उन्हें गढ़िया लोहार कहा जाने लगा। उन्होंने कहा कि यह समुदाय महाराणा प्रताप की सेना के लिए तलवार, भाले और अन्य अस्त्र-शस्त्र बनाने का कार्य भी करता था और इस प्रकार राष्ट्र और स्वाभिमान की रक्षा में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उद्योगपति एवं समाजसेवी अजय शिंगला उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसे हिंदू सम्मेलन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से हिंदू समाज जागरूक और संगठित रहता है तथा समाज के सामने आने वाली चुनौतियों पर सामूहिक रूप से विचार कर उनके समाधान का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम में वैदिक परिवार के सचिव डॉ. राजवीर आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपने संबोधन में पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए पंच परिवर्तन—स्वदेशी का आग्रह, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता—पर कार्य करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब समाज इन पाँच विषयों को अपने जीवन में उतारेगा, तभी राष्ट्र और समाज का वास्तविक विकास संभव होगा।

सम्मेलन के अंत में उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया गया कि वे भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएँ। कार्यक्रम में वैदिक परिवार के प्रधान डॉ पवन बंसल, डॉ राजवीर आर्य, दलबीर आर्य, ईश कुमार राणा,मनीष कुमार,सेवा भारती से सुरेश गांधी, प्रदीप कुमार, अशोक अरोड़ा, राजीव सचदेवा, गुलाब सिंह, कांशी सिंह, बृजेश कुमार, श्रीभगवान आर्य, शकुंतला आर्य,अश्वनी धींगड़ा, दीपक कुमार, सौरभ, सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोग भी उपस्थित रहे।

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