जबसे स्मार्ट मीटर लगने शुरू हुए तब से आमजन के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियां भी विरोध कर रही

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी

बिल भुगतान करने के बाद भी घंटों और पूरे-पूरे दिन बहाल तक नहीं पा रही..!!

गाँव की सादगी भरी जिंदगी जीने वाले आमजन स्मार्ट मीटर ऐप डाउनलोड करना तक नही जानते

सरकार के द्वारा लगातार आमजन को राहत न देकर उनको परेशानियों का सामना करा रही है! जब से स्मार्ट मीटर लगने शुरू हुए हैं तब से आमजन के साथ-साथ राजनीतिक पार्टिया भी इसका विरोध कर रही हैं! सबसे बड़ी बात यह है कि इन स्मार्ट मीटरो के बारे में गरीब इंसान व बगैर लिखे पड़े लोग ज्यादा नहीं जानते हैं ना ही उन्हें यह मालूम है कि स्मार्ट मीटर के ऐप को डाउनलोड कर अपने बिजली यूनिटों का जानकारी की जाती है बल्कि देखने में यह भी आ रहा है कि जिस उपभोक्ता ने एडवांस में पैसा जमा कर दिए हैं और उनके कितनी यूनिट फुकी है और यूनिट पूरी होने के बाद किसी भी वक्त बिजली बंद हो जाती है तो वह क्या करें!उत्तर प्रदेश में लागू की गई स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली उपभोक्ताओं के लिए सुविधा नहीं केवल समस्या बन रही है! बकाया बिल होने के कारण ऑनलाइन काटी गई बिजली बिल भुगतान करने के बाद भी घंटों और पूरे-पूरे दिन बहाल नहीं की जा रही है। उपभोक्ताओं को बिजली अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर का बकाया बिल का ऑनलाइन या काउंटर पर भुगतान करते ही नियमतः बिजली तुरंत चालू हो जानी चाहिए। शहर हो या गांव में हकीकत इसके विपरीत है। बिल जमा करने के बाद भी उपभोक्ताओं को घंटों या पूरे दिन और रात बिजली आने का इंतजार करना पड़ रहा है! बिजली घरों और कार्यालयों पर तैनात कर्मचारियों से शिकायतें करने पहुंच रहे उपभोक्ताओं को कर्मचारी और अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे कि उनके पास बिजली चालू करने या काटने का कोई अधिकार नहीं है!अधिकारी कर्मचारियों का कहना है कि प्रीपेड मीटर की पूरी मॉनिटरिंग और बिजली काटने या जोड़ने की प्रक्रिया मुख्य कार्यालय से संचालित हो रही है। सर्वर में देरी या डेटा अपडेट न होने के कारण भुगतान की सूचनाएं मुख्यालय कार्यालय तक न पहुंचने या देरी से पहुंचने के कारण बिजली समय पर बहाल नहीं हो पा रही है!बल्कि जबतक उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देने के लिए जब तक सिस्टम पूरी तरह से ठीक न हो जाए तब तक स्मार्ट प्रीपेड मोड के विस्तार पर रोक लगाई जानी चाहिए!साथ ही बिल भुगतान के बाद बिजली बहाल करने के लिए निर्धारित अवधि तय की जाए। उस दौरान बिजली बहाल न होने पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्घ कार्रवाई की जाए तथा उपभोक्ताओं की मर्जी के बिना स्मार्ट प्रीपेड मीटर न लगाए जाएं।

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