यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिया गया “ज़हरीला सांप” जैसा बयान कोई सामान्य चूक नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की दशकों पुरानी तुष्टिकरण और विभाजनकारी राजनीति की झलक है: डॉ. राजेश्वर सिंह
लखनऊ डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास ऐसे अनेक निर्णयों से भरा पड़ा है, जिनमें न्याय और समानता की बजाय वोट बैंक को प्राथमिकता दी गई—चाहे वह 1986 का शाह बानो प्रकरण हो, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटकर एक मुस्लिम महिला के अधिकारों से समझौता किया गया; या फिर वक्फ अधिनियम 1995, जिसने भूमि प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने आगे कहा कि 2011 का प्रस्तावित साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक भी व्यापक आलोचना का विषय बना, क्योंकि उसमें कानून को साम्प्रदायिक आधार पर झुकाने का प्रयास दिखाई दिया। समान नागरिक संहिता (UCC) का वर्षों तक विरोध और तथाकथित “चयनात्मक सेक्युलरिज़्म” ने समाज को जोड़ने के बजाय विभाजित करने का काम किया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि जब राजनीति का आधार तुष्टिकरण हो, तो भाषा का विषाक्त होना स्वाभाविक है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का भारत विकास, कानून के समक्ष समानता और राष्ट्रहित की दिशा में आगे बढ़ चुका है, जबकि कांग्रेस अब भी पुरानी सोच में जकड़ी हुई है।
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है, पर आश्चर्यजनक नहीं,” उन्होंने कहा।