यूपी लाइव न्यूज 24 लखनऊ रायबरेली
उप संपादक संजय मिश्रा
दिन हो या रात बिजली सुधारने खंभों पर चढ़ जाते है लाइनमैन सहायक
अयोध्या अमानीगंज। जी हां आप को बताते चलें कि आंधी-तूफान से भरी बारिश हो या फिर उमस से भरी गर्मी, कहीं बिजली लाइन फाल्ट हो जाए तो तुरंत एक ही व्यक्ति की याद आती है वो हैं- लाइनमैन। ये हीरो एक ही मोबाइल-फोन काल पर तुरंत अपनी जान हथेली पर रख बिजली पोल या घर तक पहुंच पड़ते है। फिर उपभोक्ताओं के चेहरे पर राहत देकर लौट जाते है। कल्पना कीजिए..यदि यह फ्रंट लाइन कर्मचारी न हो तो हम इस आधुनिक युग में जी नहीं पाएंगे। हर समय करंट से जान जोखिम में रखकर काम करनेवाले से कर्मचारी कम वेतन पर निर्भर है। जबकि बिजली की सेवाओं में पहले की अपेक्षा जनसंख्या और बसाहट का दबाव भी बढ़ा है। फिर भी वे दिन-रात 24 घंटे उपभोक्ताओं की सेवा में पहुंचते है।अमानीगंज फीडर के लाइनमैन सहायक अमित शर्मा, हरीश पांडे, शिवबरन यादव, आदर्श मिश्रा, प्रमोद तिवारी, मनीराम, राजेश शुक्ला इसके अलावा बिजली लाइन का मेंटनेंस समेत अन्य बिजली संंबंधी कार्य में उनका योगदान रहता है। इन लोगों के द्वारा दिन हो या रात कभी भी विद्युत बाधा आने पर तुरंत दौड़ पड़ते है बिजली कंपनी के मुख्य किरदार ग्रामीण लाइनमैन सहायक के द्वारा खंभों पर चढऩे के लिए न रात देखी और न दिन, न धूप देखी और न कभी टिमटिमाता पानी। बस केवल एक ही जूनून सवार था कि अपने कर्तव्यों की पूर्ति करना है। उद्देश्य यही था कि आप अपने घरों में सुरक्षित रहें व घर से बाहर न निकलें। सवाल यह है कि क्या बिजली मंत्री को यह नहीं पता कि आठ हजार का वेतन पाने वाले लाइनमैन सहायक का कैसे होगा गुजारा