प्राचीन परम्परा के तहत ढोल नगाड़े के साथ विसर्जित हुई मौर

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

सह संपादक कपिल गुप्ता

कोंच जालौन नगर के सागर तालाब के तट पर नव विवाहितों की मौर का विसर्जन ढोल नगाढ़ो के साथ किया गया! इस बर्ष जिन कन्याओं के विवाह हुए हैं उनकी मौर का विसर्जन यहां सागर तालाब, धनुताल आदि के जल में किया गया। महिलाएं गाजे बाजे के साथ जलाशयों पर पहुंची और विधि विधान से मौर विसर्जित की बुंदेलखंड में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला लोक पर्व मौर छठ सोमवार को प्राचीन परंपरा के तहत मनाया गया। इस बर्ष में जिन कन्याओं के विवाह हुए हैं उन घरों में कन्या की मौर का विसर्जन नदी तालाब या सरोवरों में करने की परंपरा है। मौरछठ पर कन्या के घर से वर के यहां वस्त्राभूषण और घर गृहस्थी में काम आने वाली तमाम सामग्री भेजे जाने की भी परंपरा है। मौरछठ देखने का वुलौआ भी लगाया जाता है। कन्या के परिवार और उनके आसपास की महिलाएं सजधज कर गाजेबाजे के साथ मंगलगीत गाती हुईं सरोवर तक जाती हैं और कन्या की उस मौर जिसे वह विवाह के समय धारण करती है, को जल में विसर्जित कर दिया जाता है। यहां सागर तालाब, धनुताल, भुंजरया तालाब, चौड़िया ताल आदि पर महिलाओं की भीड़ लगी रही इस दौरान प्रेमा गुप्ता शालिनी देवी नीता रेहा उषा दीक्षा आदि महिलाए मौजूद रहे है

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