दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव में चालीस लाख तक खर्च कर सकता है एक उम्मीदवार

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ब्राम्भ अनुभूति अखबार लखनऊ
यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

वरिष्ठ राष्ट्रीय संपादक अभिषेक उपाध्याय

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं, जहां 70 विधानसभा सीटों पर 5 फरवरी को मतदान होगा. चुनाव आयोग ने इस बार उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की सीमा 40 लाख रुपये तय की है. यह सीमा 2020 के चुनाव में निर्धारित 28 लाख रुपये से रुपये अधिक है. चुनाव आयोग ने खर्च की सीमा 12 लाख रुपए बढ़ाई है.
आयोग ने उम्मीदवारों के खर्चों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं. प्रत्येक उम्मीदवार को चुनावी खर्च का रिकॉर्ड रखना होगा और इसे नियमित रूप से मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय में जमा करना होगा. इसके लिए उम्मीदवारों को अलग से बैंक खाता खोलने का निर्देश दिया गया है. चुनाव आयोग की विशेष टीमें चुनावी खर्चों की निगरानी करेंगी. इन टीमों में व्यय पर्यवेक्षक और उड़नदस्ते शामिल होंगे, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी उम्मीदवार तय सीमा से अधिक खर्च न करे.

नामांकन प्रक्रिया: नामांकन प्रक्रिया 10 जनवरी से शुरू होगी और उम्मीदवार 17 जनवरी तक अपने नामांकन पत्र जमा कर सकते हैं. 18 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी. वहीं 20 जनवरी को उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे और उसी दिन उन्हें चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे.
चुनाव प्रचार और मतदान: चुनाव प्रचार तीन फरवरी की शाम 5 बजे समाप्त हो जाएगा. इसके बाद 5 फरवरी को मतदान होगा. चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं.
परिणाम की घोषणा: मतगणना 8 फरवरी को होगी और उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे. यह दिन दिल्ली की राजनीति के लिए बेहद अहम होगा, क्योंकि यह तय करेगा कि अगले पांच वर्षों के लिए राजधानी का नेतृत्व कौन करेगा.

चुनाव आयोग की तैयारियां: चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र बनाने के लिए चुनाव आयोग ने व्यापक तैयारियां की हैं. आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है और सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को इसके पालन का निर्देश दिया गया है.

जनता की भागीदारी महत्वपूर्ण: दिल्ली चुनाव 2025 न केवल राजधानी की राजनीति बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं. जनता की भागीदारी और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. इस बार का चुनाव उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए एक परीक्षा होगी, जिसमें पारदर्शिता और जिम्मेदारी की कसौटी पर खरा उतरना जरूरी होगा.

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