दिल्ली पुलिस से हाई कोर्ट ने पूछा- क्या विरोध प्रदर्शन करना यू ए पी ए लगाने के लिए पर्याप्त है

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ब्राम्भ अनुभूति अखबार लखनऊ
यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

वरिष्ठ राष्ट्रीय संपादक अभिषेक उपाध्याय

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस से पूछा कि केवल धरना का आयोजन करना, क्या किसी के खिलाफ UAPA लगाने के लिए पर्याप्त है. जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच दिल्ली दंगा के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम समेत दूसरे आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर कल यानि 9 जनवरी को भी सुनवाई जारी रखेगा. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि आरोपी एक कानून का विरोध कर रहे थे, और उन्होंने समझा हो कि चक्का जाम भी विरोध करने का एक वैध तरीका है.
क्या विरोध प्रदर्शन करना UAPA लगाने के लिए पर्याप्त है: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या चक्का जाम करना यूएपीए लगाने के लिए एक पर्याप्त वजह है. दरअसल सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील अमित प्रसाद ने व्हाट्सएप ग्रुप पर हुए चैट का जिक्र किया. अमित प्रसाद ने कहा कि व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये हिंसा को उकसाने की कार्रवाई की गई. उसके बाद कोर्ट ने पूछा कि आपने व्हाट्सएप ग्रुप के दो लोगों को कैसे छोड़ दिया, अगर आप उनकी बातचीत पर भरोसा कर रहे हैं.
दिल्ली पुलिस के वकील से सवाल: सुनवाई के दौरान अमित प्रसाद ने विरोध प्रदर्शनों के वीडियो दिखाए. तब कोर्ट ने कहा कि ये सब कुछ हुआ, ये हम जानते हैं, लेकिन आप ये बताइए कि इससे व्हाट्सएप चैट का क्या रिश्ता है. अमित प्रसाद ने कहा कि शाहीन बाग का आंदोलन स्वत: स्फूर्त नहीं था, बल्कि उसकी योजना बनाई गई थी. अमित प्रसाद ने कहा कि ये आंदोलन स्वत: स्फूर्त कैसे हो सकता है, क्योंकि उस आंदोलन को स्थानीय लोगों का समर्थन नहीं था.
शरजील इमाम की गिरफ्तारी: बता दें कि शरजील इमाम को 25 अगस्त 2020 को बिहार से गिरफ्तार किया गया था. दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम के खिलाफ यूएपीए के तहत दाखिल चार्जशीट में कहा है कि शरजील ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को अखिल भारतीय स्तर पर ले जाने के लिए बेताब था और ऐसा करने की जी तोड़ कोशिश कर रहा था.
दिल्ली दंगों का मामला: फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी, और काफी लोग घायल हुए थे. इस मामले में 750 मुकदमें दर्ज किए गए थे. इस मामले में दिल्ली की एक निचली अदालत ने सितंबर 2024 में 10 आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में सभी आरोपियों पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए, इसलिए उन्हें बरी किया जाता है.
UAPA क्या है? यूएपीए का मतलब गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम है, जिसका अर्थ है कि किसी भी अवैध गतिविधियों में शामिल पाया गया व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन है. यूएपीए को 1967 में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों या देश की अखंडता को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को रोकने के लिए अधिनियमित किया गया था.

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