ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
नई दिल्ली: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में रोहिंग्या छात्रों का दाखिला बीते दो दिनों से विवादों में है. आम आदमी पार्टी इस मामले पर बीजेपी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है और नई रेखा सरकार से इस पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग कर रही है. वहीं, बीजेपी ने सरकारी स्कूलों में रोहिंग्या बच्चों के दाखिले के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार बताया है.
सोमवार को इस मुद्दे पर प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने वर्ष 2017 में आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा जारी आदेश की प्रति जारी करते हुए कहा कि इसमें तत्कालीन आप सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किस तरह रिफ्यूजी छात्रों को दाखिला देना है. 28 अप्रैल 2017 को एडिशनल डायरेक्टर एजुकेशन डॉ सुनीता कौशिक द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि अगर किसी रिफ्यूजी के पास रिफ्यूजी कार्ड/सर्टिफिकेट आदि है तो उस आधार पर उनके बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला मिल सकता है. प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि इस आदेश में यह भी लिखा है कि सिर्फ आधार कार्ड नहीं होने पर उन्हें स्कूलों में दाखिला देने से नहीं रोका जा सकता है.
रोहिंग्या छात्रों के एडमिशन पर AAP ने भाजपा को घेरा था:
रविवार को आम आदमी पार्टी ने रोहिंग्या को लेकर बीजेपी पर दोहरी नीति होने का आरोप लगाया था. आप विधायक अनिल झा ने कहा था कि बीजेपी की डबल इंजन की सरकार ने दिल्ली के बच्चों का हक मारकर पूर्वी दिल्ली के करावल नगर के एक सरकारी स्कूल में 10 रोहिंग्या बच्चों को एडमिशन दे दिया है. एक तरफ बीजेपी रोहिंग्या को लेकर हंगामा करती है तो दूसरी तरफ उनको समर्थन देती है. आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध करते हुए जांच कराने की मांग की है.
आम आदमी पार्टी का कहना है कि देश के बॉर्डर की सुरक्षा केंद्र सरकार की है. केंद्र सरकार के अधीन बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और सेंट्रल रिजर्व फोर्स है. देश की खुफिया एजेंसी केंद्र सरकार की है. इसके बावजूद हजारों की संख्या में रोहिंग्या दिल्ली तक पहुंच गए. इनकी वजह से हरियाणा, गुड़गांव, नोएडा समेत चारों तरफ अस्थिरता फैल रही है. आखिर केंद्र सरकार रोहिंग्या को दिल्ली में क्यों बसाना चाहती है. दिल्ली के स्कूलों में रोहिंग्या के बच्चों को दाखिला क्यों देना चाहती है? बीजेपी की दिल्ली सरकार को अल्पसंख्यक, दलित, झुग्गियों में रह रहे बच्चों की शिक्षा की चिंता करनी चाहिए, लेकिन ये लोग घुसपैठिए रोहिंग्याओं का स्वागत कर रहे हैं.