पंजाब सीएम भगवंत मान और शरद पवार का केंद्र सरकार की सुरक्षा लेने से इनकार

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी

नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा को लेने से इनकार कर दिया है.इस संबंध में सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि भगवंत मान को पिछले साल वाई प्लस सुरक्षा प्रदान की गई थी. लेकिन उन्होंने (मान) सीआरपीएफ द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
इसी तरह, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने भी केंद्र सरकार की सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया. अधिकारी ने बताया, “शरद पवार को जेड सुरक्षा दी जानी थी. लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया.”
बता दें कि खतरे की समीक्षा के बाद वीआईपी और वीवीआईपी को सुरक्षा प्रदान की जाती है. गौरतलब है कि सीआरपीएफ ने 4 अप्रैल को दक्षिण अभिनेता जोसेफ विजय चंद्रशेखर की सुरक्षा का जिम्मा संभाला था. अधिकारी ने कहा, “फिल्म अभिनेता को पूरे तमिलनाडु में वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है.”
सीआरपीएफ की वीआईपी सुरक्षा शाखा द्वारा 206 लोगों को सुरक्षा प्रदान की जाती है अधिकारी ने आगे कहा कि एजेंसी सभी वीआईपी और वीवीआईपी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार है, यदि ऐसी कोई व्यवस्था हो जहां केवल एक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी को उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का काम सौंपा जाएगा.उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय एक रणनीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत केवल एक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी को वीआईपी सुरक्षा प्रदान करने का कार्य सौंपा जाएगा.

गृह मंत्रालय वीआईपी सुरक्षा का पूरा जिम्मा सीआरपीएफ को सौंपने के विचार पर काम कर रहा है. इस सिलसिले में नॉर्थ ब्लॉक में कई बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें आईबी, सीआरपीएफ, एनएसजी और अन्य के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

इस मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यह पहल इस तथ्य के बाद की गई है कि सीआरपीएफ के संसद ड्यूटी ग्रुप (PDG) को संसद सुरक्षा ड्यूटी के लिए नियुक्त किया गया था, जिसे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) द्वारा संसद में समग्र सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी संभालने के बाद वापस ले लिया गया है.
अधिकारी ने कहा, “जब वीआईपी सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ द्वारा ले लिया जाएगा तो वीआईपी सुरक्षा प्रदान करने वाले अन्य सभी बल इस जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे.” अभी तक एनएसजी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी वीआईपी सुरक्षा प्रदान करते हैं.

खतरे की आशंका की समीक्षा के लिए बैठक

खुफिया ब्यूरो (IB), गृह मंत्रालय, रॉ और कई अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में समय-समय पर खतरा समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं.
अधिकारी ने कहा, “ऐसी बैठकों के दौरान किसी व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता पर विस्तृत समीक्षा की जाती है. इस बैठक में ही यह निर्णय लिया जाता है कि किसी व्यक्ति की सुरक्षा को कम किया जाए या बढ़ाया जाए.”

सीआरपीएफ की वीआईपी सुरक्षा शाखा

सीआरपीएफ की वीआईपी सुरक्षा शाखा एक विशेष शाखा है जो गृह मंत्रालय के सुझाव के अनुसार कई गणमान्य व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करती है.
सुरक्षा एजेंसी विभिन्न श्रेणियों जैसे जेड+, जेड, वाई, वाई+ और एक्स के तहत सुरक्षा प्रदान करती है. वीआईपी में केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजनेता, सरकारी अधिकारी, आध्यात्मिक और धार्मिक नेता, व्यवसायी और अन्य प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं.

सात बटालियन प्रदान करती हैं वीआईपी सुरक्षा

सीआरपीएफ की छह वीआईपी सुरक्षा बटालियन हैं, को भी एक और बटालियन मुहैया कराई गई है. इससे कुल संख्या सात हो गई है. हालांकि नई बटालियन वही है जो कुछ महीने पहले तक संसद की सुरक्षा करती थी.

प्रमुख हस्तियों को मिल रही सीआरपीएफ सुरक्षा

सीआरपीएफ सुरक्षा प्रदान किए गए कुछ लोगों में गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा, बिजनेस टाइकून अदार पूनावाला, मुकेश अंबानी, नीता अंबानी शामिल हैं.

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