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ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी
नई दिल्ली: ओडिशा सरकार ने मंगलवार को भारत की सबसे बड़ी डुअल-फीड नेफ्था क्रैकर परियोजना के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया. यह समझौता पूर्वी भारत को औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इसे जगतसिंहपुर जिले के पारादीप में विकसित किया जाएगा, जो ओडिशा की ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल-आधारित विकास औद्योगीकरण की आकांक्षाओं के लिए 61,077 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश है.
एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा, “यह पहल पूर्वी भारत के समावेशी विकास के उद्देश्य से एक परिवर्तनकारी योजना है, जिसमें मानव संसाधन विकास, बुनियादी ढांचे में वृद्धि और आर्थिक अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि इस क्षेत्र को ‘विकसित भारत’ का प्रमुख चालक बनाया जा सके.”
सीएम माझी ने कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आज का कार्यक्रम उस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. यह राष्ट्रीय विकास को गति देगा और भारत को 2030 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगा.”
नेफ्था क्रैकर परियोजना पूर्वी भारत के लिए केंद्र के ‘पूर्वोदय’ दृष्टिकोण का प्रमुख घटक होगी. यह IOCL का किसी एक स्थान पर किया गया अब तक का सबसे बड़ा निवेश है.
70,000 करोड़ रुपये का निवेश
आईओसीएल के साथ समझौता ओडिशा के ऊर्जा क्षेत्र में 70,000 करोड़ रुपये के निवेश के व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसमें दो अन्य समझौता ज्ञापन शामिल हैं. जाजपुर में आईएसपीआरएल की 4 एमएमटी कच्चे तेल भंडारण सुविधा शामिल है, जिसमें 8,743 करोड़ रुपये का निवेश होगा. इसी तरह, गंजाम जिले के गोपालपुर में पेट्रोनेट एलएनजी द्वारा 2,306 करोड़ रुपये के निवेश से 4 एमटीपीए एलएनजी टर्मिनल विकसित किया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “ये परियोजनाएं आयात के लिए गेम चेंजर साबित होंगी, आयात पर निर्भरता को कम करेंगी और भारत के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी.”
पारादीप परियोजना
गेम-चेंजर पारादीप पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स आईओसीएल की रिफाइनरी क्षमता को 15 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 25 मिलियन टन कर देगा, जिसमें प्रमुख पेट्रोकेमिकल्स का उत्पादन करने के लिए डुअल फीड क्रैकर होंगे. इस परियोजना से सालाना 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की आयात लागत बचने का अनुमान है. साथ ही पॉलिमर और विशेष रसायनों में भारत की आत्मनिर्भरता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
सीएम माझी ने कहा कि पोर्ट ऑफ एंटवर्प, पोर्ट ऑफ ह्यूस्टन और जुरोंग द्वीप की तरह पारादीप दुनिया के अग्रणी रासायनिक केंद्र में के रूप में उभरेगा. यह परियोजना क्लस्टर-आधारित तालमेल, फीडस्टॉक शेयरिंग, नवाचार और कौशल विकास केंद्रों जैसी सामान्य सुविधाओं का लाभ उठाएगी.”
भरेगा ओडिशा का खजाना
इस पहल से ओडिशा के खजाने में सालाना 8,500 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान होगा और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इससे फार्मास्यूटिकल्स, एग्रोकेमिकल्स, एडहेसिव्स, कोटिंग्स, पैकेजिंग प्लास्टिक और अन्य जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों में एमएसएमई विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
ओडिशा का तटीय क्षेत्र इसे दक्षिण-पूर्व एशिया और उससे आगे के निर्यात के लिए आदर्श बनाता है. ओडिशा पहले से ही पूर्व में भारत के निर्यात के लिए प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है, और पेट्रोकेमिकल हब के जुड़ने से इसका रणनीतिक आर्थिक मूल्य और बढ़ जाता है.
माझी ने कहा, “ओडिशा में अपार अवसर हैं और मैं सभी उद्यमियों और निवेशकों से आग्रह करता हूं कि वे इन अपार अवसरों का लाभ उठाएं.” उन्होंने कहा, “यह क्षेत्र प्रधानमंत्री की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का भी समर्थन करता है और इसमें भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलने की क्षमता है.”
केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा, “इंडियन ऑयल ने पिछले दशक में ओडिशा में लगभग 55,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है. यह समझौता ज्ञापन अतिरिक्त 70,000 करोड़ रुपये का प्रतिनिधित्व करता है और इस क्षेत्र में आगे की सहायक आर्थिक गतिविधि को खोलेगा. यह अगले 25 वर्षों के लिए बहुत अच्छी शुरुआत है.”