गुजरात में तीस साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस, सत्ता में वापसी के लिए अधिवेशन में प्रस्ताव किया पारित

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ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

उप संपादक संजय मिश्रा

अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सेशन में राज्य में कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने पर केंद्रित एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया. इस बात की जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने पार्टी के एक नेता के हवाले से दी. बता दें सूबे में 1995 से भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में है.

यह प्रस्ताव ‘गुजरात में कांग्रेस की आवश्यकता क्यों है’ टाइटल से पेश किया गया है. इस प्रस्ताव में पार्टी की ‘नूतन गुजरात, नूतन कांग्रेस’ (नया गुजरात, नई कांग्रेस) के आदर्श वाक्य के साथ सत्ता में वापस आने की रणनीति को रेखांकित किया गया है. इसमें वादा किया गया है कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्गों (OBCs) और अल्पसंख्यकों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए गुजरात में जातिगत सर्वे कराया जाएगा.

पहली बार लाया गया स्टेट स्पेसिफिक प्रस्ताव

सेशन के दौरान एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह उनकी पार्टी के इतिहास में पहली बार है जब एआईसीसी सत्र के दौरान राज्य-स्पेसिफिक प्रस्ताव लाया गया है. जब उनसे पूछा गया कि यह प्रस्ताव क्यों लाया गया है, तो उन्होंने कहा, “यह सत्र गुजरात में आयोजित किया जा रहा है और हम पिछले 30 साल से राज्य में सत्ता से बाहर हैं.”
उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने ही 1960 और 70 के दशक में गुजरात के विकास की नींव रखी थी. हालांकि, भाजपा शासन में इसके विकास को झटका लगा है. इसलिए, हम आज के सत्र के दौरान गुजरात पर यह विशेष प्रस्ताव ला रहे हैं.”

गुजरात में कांग्रेस की जरूरत क्यों?

कांग्रेस नेता ने कहा, “गुजरात में कांग्रेस की जरूरत क्यों है टाइटल वाले इस प्रस्ताव में सत्ता में वापसी के लिए पार्टी की रणनीति, लोगों के सामने आने वाले मुद्दे, हमारे द्वारा लागू की जाने वाली आर्थिक नीतियां और राज्य के छात्रों, व्यापारियों, किसानों, मजदूरों, मध्यम वर्ग और उद्योगपतियों के लिए हम क्या कर सकते हैं, न कि केवल एक या दो पूंजीपति मित्रों के लिए.”

उद्योगपतियों पर पार्टी के रुख को स्पष्ट करने की मांग करते हुए रमेश ने कहा कि पार्टी हमेशा वास्तविक व्यापारियों, खासकर छोटे और मध्यम उद्यम चलाने वालों के समर्थन में रही है, लेकिन “एक या दो कॉरपोरेट्स के नहीं, जिन्हें सारा लाभ मिलता है.”
उन्होंने कहा, “गुजरात में सभी बड़ी फैक्ट्रियां कांग्रेस के शासन में स्थापित की गई थीं. कांग्रेस ने ही गुजरात में औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा दिया.” रमेश के अनुसार, देश की 80 प्रतिशत स्टेनलेस स्टील यूनिट गुजरात में हैं, लेकिन उनमें से एक तिहाई अब बंद हो चुकी हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया.
उन्होंने कहा, “यह भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे हम उजागर करना चाहते हैं।” उन्होंने दावा किया, ” अगर आप शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्र के आंकड़े देखें, तो गुजरात एक विकसित राज्य होने के बावजूद केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों से पीछे है.”
प्रस्ताव में किए गए वादे
प्रस्ताव में उल्लिखित अन्य प्रमुख वादों में खेत में काम करने वाले मजदूरों को भूमि का आवंटन, पंचायतों (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम के प्रावधानों का उचित कार्यान्वयन, सरकारी नौकरियों में निश्चित वेतन और कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को समाप्त करना और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का कानूनी आश्वासन शामिल है.
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात पर 1995 से भाजपा सत्ता में है. 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य की 182 सीटों में से सिर्फ 17 सीटें मिलीं, लेकिन पांच विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में पार्टी की संख्या घटकर 12 रह गई.

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