यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
जब 2019 की जांच रिपोर्ट में सुनील कुमार उपाध्याय को विवाहित माना गया था, तो 2025 के आदेश में उनकी पत्नी प्रेम कुमारी का उल्लेख क्यों नहीं।
अयोध्या जनपद के मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र के रामपुर जोहन गांव में एक विधवा महिला का राशन कार्ड निरस्त किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्ति निरीक्षक द्वारा विवाह प्रमाण पत्र मांगे जाने के बाद यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पीड़िता प्रेम कुमारी का कहना है कि यदि विवाह प्रमाण पत्र के आधार पर ही राशन कार्ड जारी होते हैं, तो तहसील में बनाए गए हजारों राशन कार्ड किस आधार पर जारी किए गए हैं। प्रेम कुमारी के पति सुनील कुमार उपाध्याय की 3 अगस्त 2021 को सर्पदंश से मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उन्होंने पति की संपत्ति के खारिज दाखिल के लिए मिल्कीपुर तहसीलदार न्यायालय में आवेदन किया था इस दौरान उनके जेठ और जेठानी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए मृतक को अविवाहित बताया। जेठ-जेठानी की आपत्ति पर प्रभारी तहसीलदार रंजन वर्मा ने 11 नवंबर 2025 को आदेश पारित करते हुए मृतक की संपत्ति का हकदार उनके बड़े भाई अनिल कुमार उपाध्याय को घोषित कर दिया। प्रेम कुमारी का आरोप है कि आदेश पारित करते समय उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए 27 साक्ष्यों की अनदेखी की गई। तहसीलदार के आदेश के बाद पूर्ति निरीक्षक ने प्रेम कुमारी का राशन कार्ड भी निरस्त कर दिया। इस बीच एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। वर्ष 2019 की एक जांच रिपोर्ट में मिल्कीपुर तहसीलदार द्वारा सुनील कुमार उपाध्याय को विवाहित बताया गया था। रिपोर्ट में उनके पिता दीनानाथ उपाध्याय की संपत्ति में बेटे और बेटियों के हिस्से का भी उल्लेख है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब 2019 की जांच रिपोर्ट में सुनील कुमार उपाध्याय को विवाहित माना गया था, तो 2025 के आदेश में उनकी पत्नी प्रेम कुमारी का उल्लेख क्यों नहीं किया गया। न्याय की उम्मीद में प्रेम कुमारी ने तहसीलदार के आदेश के खिलाफ एसडीएम मिल्कीपुर के न्यायालय में वाद दायर किया है। उधर, राशन कार्ड निरस्त होने के कारण वह आर्थिक तंगी और भुखमरी जैसी स्थिति से जूझ रही हैं। इस मामले में पूर्ति निरीक्षक ऋषीश कुमार सिन्हा का कहना है कि विवाह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते ही राशन कार्ड पुनः जारी कर दिया जाएगा।