यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
क्राइम रिपोर्टर अरुण प्रताप सिंह
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर नीट पीजी काउंसिलिंग में एससी-एसटी और ओबीसी अभ्यर्थियों को माइनस 40 नंबर पर भी काउंसिलिंग के लिए बुलाने को चुनौती दी गई है. याची अधिवक्ता अभिनव गौर ने इसे संविधान के अनुच्छेद 16(4) के विपरीत बताते हुए कहा कि याचिका में इस आधार पर इसे चुनौती दी गई है कि नीट पीजी 2025 के लिए कटऑफ अंकों में काफी कमी से मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया की पवित्रता समाप्त हो जाएगी.
जनहित याचिका दाखिल कर चुनौती दी गयी: याचिका में कहा गया है कि जब 19 अगस्त 2025 को नीट पीजी 2025 के नतीजे घोषित किए गए थे तो क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल मूल नीट पीजी 2025 इंफॉर्मेशन बुलेटिन के अनुसार थे. काउंसिलिंग के दूसरे राउंड के बाद 18 हजार से ज़्यादा सीटें खाली रहने के बाद, बोर्ड ने क्वालीफाइंग क्राइटेरिया को काफी कम कर दिया और एससी-एसटी एवं ओबीसी वर्ग के लिए स्कोर- 40/800 तय कर दिया.
कटऑफ 276 से घटाकर 103 किया गया: याचिका में यह भी कहा गया है कि सामान्य (आर्थिक पिछड़ा) वर्ग में कटऑफ 276 से घटाकर 103 कर दिया गया है. एससी-एसटी व ओबीसी वर्ग में इसे 235 से घटाकर माइनस 40 नंबर कर दिया गया. यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीज़ों की सुरक्षा पर बुरा असर डालेगा, जो सार्वजनिक चिंता के सबसे महत्वपूर्ण मामले हैं.इसमें उच्च स्तर की शैक्षणिक सटीकता शामिल है. ऐसे डॉक्टरों की गुणवत्ता, जिनके पास परीक्षा पास करने के लिए न्यूनतम योग्यता नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार को प्रभावित करेगी.