आज ही डालें हरित भविष्य की नींव : ग्रीन बिल्डिंग्स सम्मेलन में डॉ. राजेश्वर सिंह का आह्वान

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

हरिावरण संकट पर चेतावनी, हरित समाधान पर संकल्प: डॉ. राजेश्वर सिंह का दूरदर्शी दृष्टिकोण

लखनऊ सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को होटल ग्रैंड जेबीआर, गोमती नगर में लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित “ट्रांसफॉर्मिंग रियल एस्टेट इन उत्तर प्रदेश थ्रू ग्रीन बिल्डिंग्स” विषयक सम्मेलन में सहभागिता की।

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ग्रीन एनर्जी अब विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्यावरणीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज वायु प्रदूषण, गिरता भूजल स्तर और बढ़ता AQI भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी हैं। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की असमय मृत्यु वायु प्रदूषण के कारण होती है, जिनमें से लगभग 24 लाख भारत में हैं। उन्होंने अर्थ ओवरशूट डे का उदाहरण देते हुए कहा कि 1972 में यह दिन 26 दिसंबर था, जबकि अब यह अगस्त के पहले सप्ताह तक आ चुका है—जो यह दर्शाता है कि मानवता प्रकृति की क्षमता से कहीं अधिक उपभोग कर रही है।

ग्रीन बिल्डिंग्स पर बल देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यह केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा, “हर नागरिक को यह गर्व होना चाहिए कि उसका घर, उसकी सोसायटी, उसका बाज़ार और उसका शहर ग्रीन है।” उन्होंने बताया कि ग्रीन बिल्डिंग्स से 30-40 प्रतिशत ऊर्जा तथा 20-30 प्रतिशत जल की बचत संभव है। जब देश की लगभग 70 प्रतिशत इमारतें अभी बननी शेष हैं, तब यह सही समय है कि ग्रीन कंस्ट्रक्शन को मुख्यधारा बनाया जाए। उन्होंने सरकार से अधिक कर छूट, कम ब्याज दर पर ऋण, FAR में बढ़ोतरी और संपत्ति कर में रियायत जैसे प्रोत्साहनों को और मजबूत करने का आग्रह किया।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने ग्रीन बिल्डिंग कोड को अपनाकर देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है और 22,000 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो भारत के नेट ज़ीरो 2070 संकल्प के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि नीति, नियमन और राजनीतिक इच्छाशक्ति, तीनों स्तरों पर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है।

अपने क्षेत्र सरोजनीनगर के प्रयासों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि वहाँ 160 से अधिक तारा शक्ति केंद्रों के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त किया गया है। इन केंद्रों में 2000 से अधिक सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं और अब तक 30,000 से अधिक इको-फ्रेंडली स्कूल बैग तैयार कर प्राथमिक विद्यालयों में वितरित किए गए हैं, जिससे प्लास्टिक के उपयोग को कम किया गया है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय में सोलर हेल्प डेस्क संचालित है और लखनऊ की कुल 120 मेगावाट सौर क्षमता में से 60 मेगावाट से अधिक अकेले सरोजनीनगर में स्थापित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त उन्होंने शिविरी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संयंत्र प्रतिदिन लगभग 2100 मीट्रिक टन कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है और इसके माध्यम से लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बन रहा है, जो अपने संपूर्ण कचरे को ऊर्जा में बदलने की दिशा में अग्रसर है।

सम्मेलन को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी संबोधित लिया, इस दौरान सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, LMA ए.के. माथुर, अमित श्रीवास्तव (चेयरमैन, इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल – लखनऊ चैप्टर), जय कुमार गुप्ता (जनरल मैनेजर, SIDBI), अशोक कुमार, राज वर्मा, आर्किटेक्ट एस.के. सारस्वत, प्रवीन कुमार द्विवेदी सहित अनेक विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि इस सम्मेलन से प्राप्त सुझावों और विचारों को नीति स्तर पर गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश को हरित, स्वच्छ और सतत विकास का मॉडल राज्य बनाया जा सके।

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