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मुख्य संपादक प्रवीण सैनी
राजनीति नहीं, सेवा-साधना का पावन संकल्प — डॉ. राजेश्वर सिंह की ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा
लखनऊ। डॉ. राजेश्वर सिंह की ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ बनी राष्ट्रव्यापी अनुकरणीय मॉडल बन चुकी है। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में सेवा और श्रद्धा की सुदृढ़ परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आस्था का कारवां एक बार फिर आगे बढ़ा। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के द्वारा समग्र विकास के साथ जन-जन की आस्था के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, मंगलवार को ग्राम बनी के श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराने के लिए 53वीं निशुल्क ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ का संचालन किया गया। श्रद्धालुओं को अयोध्या में श्रीराम लला के भव्य मंदिर के साथ श्री हनुमानगढ़ी तथा प्रमुख मंदिरों के सुगम और व्यवस्थित दर्शन कराए गए।
यात्रा के शुभारंभ अवसर पर विधायक की टीम ने सभी श्रद्धालुओं को शाल और पटका पहनाकर सम्मानपूर्वक बसों में बैठाया। पूरे मार्ग में भोजन, जलपान, स्वास्थ्य सेवाएं और विश्राम की उत्कृष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की गई। कार्यकर्ताओं ने सेवा को ही श्रद्धा का पर्याय मानते हुए पूरी यात्रा को एक आध्यात्मिक अनुभव में परिवर्तित कर दिया। यात्रा के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद, श्रीरामचरितमानस एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
*तीन वर्षों से सतत जारी सेवा-परंपरा*
डॉ. राजेश्वर सिंह की ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ बनी राष्ट्रव्यापी अनुकरणीय मॉडल—पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने निरंतर इतनी व्यापक धार्मिक-सेवा यात्राओं का संचालन किया। सरोजनीनगर के प्रत्येक नागरिक को प्रभु श्रीराम के पावन धाम के दर्शन कराने के संकल्प के साथ, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा अपनी पूज्य माताश्री तारा सिंह की प्रेरणा से सितंबर 2022 से निरंतर संचालित यह ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ आज जनआस्था, विश्वास और निःस्वार्थ सेवा की सशक्त पहचान बन चुकी है। तीन वर्षों से अधिक समय से निरंतर जारी 53 निशुल्क यात्राओं के माध्यम से लगभग 8,000 ग्रामीणों, विशेषकर बुजुर्गों और मातृशक्ति, को अयोध्या धाम के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो चुका है।
डॉ. राजेश्वर सिंह का स्पष्ट मानना है कि यह पहल उन लोगों तक आस्था की यात्रा पहुंचाने का प्रयास है, जिनके लिए अयोध्या दर्शन अब तक केवल एक सपना था। यह ‘रामरथ श्रवण यात्रा’ वरिष्ठ नागरिकों और मातृशक्ति के सम्मान का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। यह यात्रा सरोजनीनगर में सामाजिक सद्भाव, भक्ति और जनसेवा की नई दिशा स्थापित कर रही है तथा यह प्रमाणित करती है कि राजनीति केवल शासन का माध्यम नहीं, बल्कि जनकल्याण की साधना भी हो सकती है।