रायबरेली दस अगस्त से दो सितम्बर तक मिलेए अभियान

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यूपी लाइव न्यूज 24 लखनऊ रायबरेली

वरिष्ठ ब्यूरो प्रमुख हेमराज मौर्या रायबरेली

जिले में अट्ठाइस दशमलव सैतिश लाख मिलियन जनसंख्या फाइलेरिया निवारक औषधि का लक्ष्य

साइबेरिया, जिला में 10 अगस्त से 2 सितंबर तक फाइलेरिया निवारक दवा का सेवन करने के लिए सिलिकॉन से सर्वजन औषधि (डॉक्टरेट) अभियान चलाया जाएगा। इसी क्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में मीडिया ‍आरंभिक आश्रम का आयोजन हुआ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सहारा सिंह ने कहा कि किले के 15 ब्लॉक अमावां, दिल्ली, जटुआअटप्पा, दीन शाहगौरा, बेलाभेला, शेखरावां, हरचंदपुर, खेडों, महाराजगंज, नसीराबाद, सलोन, सरेनी, ऊंचाहार और धार्मिक क्षेत्र में किआधार अभियान चलाया गया। इन ब्लॉक में आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामजीन और एल्बेंडाजोल खिलाए जाएंगे के तहत चलाए जाने वाले अभियान में शामिल किया जाएगा। फाइलेरिया मच्छर के काटने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे सामान्य रूप से हाथी पाँव के नाम से जाना जाता है। इसके मुख्य लक्षण हाथों में सूजन (हाथीपांव), पुरुषों में अंडकोष का सूजन (अंडकोश का सूजन) और महिलाओं में हाथों में सूजन (अंडकोश का सूजन) है।
फ़ाइलेरिया मैला क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला रोग है। यह बीमारी लाइलाज है। यह बीमारी ठीक नहीं है और व्यक्ति को इंटरनेट पर बेच दिया जाता है। इस बीमारी से बचने के उपाय मच्छरों से बचाव और फाइलेरिया रोधी औषधि का सेवन करें।
जिले में 28.37 मिलियन मिलियन लोगों की फाइलेरिया में औषधि का लक्ष्य है। फाइलेरिया औषधि एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गंभीर और गंभीर बीमारी से पीड़ित सभी को ठीक कर सकती है। अभियान को सफल बनाने के लिए 2565 रिकॉर्ड बनाए गए हैं और उनके सुपर विजन के लिए 427 सुपर इंडिकेटर नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और स्वयंसेवी संस्था पथ निगरानी और पर्यवेक्षण बोर्ड। जिले में एक और 15 ब्लॉक पर कुल 32 रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरसीटी) बनाई गई है जो प्रतिकार प्रतिक्रिया के लिए तत्काल आवश्यक सहयोग की व्यवस्था कर रही है। अभियान को समग्र रूप से लेकर रवाना किया गया है। वैद्य और लॉजीस्टिक पारा हो गया है।
प्रोग्राम के प्रोग्रामर डॉ. श्री कृष्णा ने बताया कि फाइलेरिया निरोधक दवा के सेवन के बाद कुछ लोगों में जी मितलाने, चकत्ते पड़ना, चक्कर आना और उल्टी जैसी समस्या हो सकती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इसका मतलब यह है कि शरीर में फाइलेरिया के परजीवियों का अस्तित्व होता है और सेवन के बाद शरीर में फाइलेरिया के परजीवियों का समाप्त होना स्वाभाविक है।
जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डी.एस.अस्थाना ने बताया कि फाइलेरिया निरोधक दवा का सेवन बहुत जरूरी है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम सामान्य हैं तो दवा क्यों प्रभावी है लेकिन दवा का सेवन जरूरी है क्योंकि फाइलेरिया का संक्रमण होने के बाद फाइलेरिया के लक्षण 10 15 साल बाद दिखाई दे रहे हैं और टैब तक हम जानेंगे रोग के प्रसार में सहयोग करते हैं। फाइलेरिया औषधि दवाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रमाणित हैं बस इस बात का ध्यान रखें कि दवा खाली पेट नहीं खानी है।
जिला मलेरिया अधिकार भीख ने बताया कि इस अभियान में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ पाथ, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) और पीसीआई जैसे स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग शामिल है।
सीफ़ोर संस्था के सहयोग से जिले में प्रचार प्रसार और पीसीआई द्वारा समुदाय में फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन करने के लिए जागरूकता की जा रही है।
इस मशीन पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राधा कृष्ण, डा. शरद कुमार, डा. अरुण कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारी, सहयोगी संस्था पथ और पीसीआई के प्रतिनिधि और मीडिया बन्धु उपस्थित रहे।

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