कोयला खदान विस्फोट मामला: एन जी टी ने केंद्र और मेघालय सरकार को जारी किया नोटिस

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी

नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में हाल ही में हुए अवैध कोयला खदान धमाके का स्वयं संज्ञान लिया है, जिसमें कथित तौर पर दो दर्जन से अधिक लोगों की जान चली गई.एक राष्ट्रीय अखबार में छपी ‘मेघालय में अवैध कोयला खदान में धमाके में 18 लोगों की मौत’ नाम की खबर पर ध्यान देते हुए, एनजीटी की एक पीठ ने मामले की सुनवाई की, जिसमें एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल शामिल थे.

हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान, पीठ ने कहा, “खबर में मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में अवैध तरीके से चल रही रैट होल कोयला खदान में डायनामाइट से हुए विस्फोट की घटना को उजागर किया गया है, जिसमें 18 खनिक मारे गए. खबर के मुताबिक, यह जुलाई 2021 के बाद से माइनिंग से जुड़ी सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से एक है. खबर में यह भी बताया गया है कि 2 साल पहले, NGT ने खतरनाक खनन के तरीके पर बैन लगा दिया था.”
खबर के मुताबिक, “थांगस्को (Thangsko) इलाके में अवैध कोयला खदान में सुबह करीब 11 बजे धमाका हुआ। डायनामाइट से धमाका होने की आशंका है, जिससे लोगों की मौत हो गई और कई लोग खदान में फंस गए. अब तक 18 शव बरामद किए जा चुके हैं. जांच के आदेश दे दिए गए हैं और मुख्यमंत्री ने हर मृतक मजदूर के परिवारजनों के लिए 3 लाख रुपये की मदद का ऐलान किया है. पुलिस ने BNSS और खान अधिनियम के तहत खुद से FIR दर्ज की है, जिसमें विस्फोटक पदार्थ अधिनियम भी शामिल है.”

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल 2014 में कोयले के खनन और परिवहन पर NGT के कड़े प्रतिबंध के बावजूद, नेताओं और दूसरे प्रभावी लोगों के समर्थन से खदान मालिक अवैध तरीके से काम कर रहे हैं, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया था.पीठ ने कहा कि यह मामला NGT के आदेशों के उल्लंघन और पालन न करने को दिखाता है, जिसमें वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अनिनियम, 1981, भारतीय वन अधिनियम, 1927 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का उल्लंघन शामिल है.

पीठ ने कहा कि यह खबर पर्यावरण नियमों के पालन और तय कानून के नियमों को लागू करने से जुड़े बड़े मुद्दे उठाती है.
मामले की गंभीरता को समझते हुए और 2021 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए, एनजीटी ने मेघालय सरकार के मुख्य सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), इंटीग्रेटेड रीजनल ऑफिस, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, शिलांग और पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के उपायुक्त को इस मामले में प्रतिवादी बनाया है.ट्रिब्यूनल ने सभी प्रतिवादियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक हफ्ते पहले एफिडेविट के जरिये अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 19 मई को तय की है.

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