एआई वैश्विक परिवर्तन का निर्णायक क्षण – ‘वैश्विक बदलाव से स्थानीय क्रियान्वयन तक’ : डॉ. राजेश्वर सिंह

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

डॉ. राजेश्वर सिंह ने ए आई को बताया वैश्विक परिवर्तन का निर्णायक क्षण, कहा- एआई से बदलेगा विकास, शासन और रोजगार का स्वरूप

लखनऊ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और उसके सामाजिक-आर्थिक परिणामों पर प्रकाश डालते हुए सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि एआई आज विकास, शासन व्यवस्था और रोजगार संरचना में परिवर्तन का निर्णायक कारक बन चुकी है।

डॉ. सिंह ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के आकलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2027 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 23% नौकरियों में बदलाव की संभावना है। जहां लगभग 69 मिलियन नई नौकरियाँ सृजित होंगी, वहीं 83 मिलियन नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं। यह परिदृश्य बड़े पैमाने पर कौशल विकास और पुनः प्रशिक्षण की अनिवार्यता को स्पष्ट करता है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार वर्ष 2030 तक 86% नियोक्ता मानते हैं कि एआई उनके व्यापार मॉडल को बदल देगी, जबकि लगभग 48% विद्यार्थी स्वयं को एआई-सक्षम कार्यस्थल के लिए पूर्णतः तैयार नहीं मानते। यह अंतर शिक्षा, प्रशिक्षण और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

*भारत का रणनीतिक एआई क्षण*

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत अब एआई अपनाने के चरण से आगे बढ़कर वैश्विक एआई नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है। नई दिल्ली में आयोजित होने वाला India-AI Impact Summit, जिसमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी प्रस्तावित है, भारत को जिम्मेदार और समावेशी एआई के वैश्विक मानदंड स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर एआई से संबंधित नीतिगत दृष्टिकोण नवाचार, सशक्त शासन व्यवस्था और समान विकास पर केंद्रित है, जिससे तकनीक का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँच सके।

*उत्तर प्रदेश: बजट समर्थित एआई पहल*

डॉ. सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2024–25 के बजट में “UP AI Mission” के लिए ₹225 करोड़ का प्रावधान राज्य की तकनीकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस मिशन के अंतर्गत एआई नवाचार, डिजिटल गवर्नेंस तथा आईटीआई संस्थानों में एआई प्रयोगशालाओं की स्थापना जैसे कदम राज्य को डिजिटल और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।

*सरोजनीनगर: भविष्य के लिए तैयार युवा*

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में युवाओं को एआई और डिजिटल युग के लिए तैयार करने हेतु स्थानीय स्तर पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र में संचालित रण बहादुर सिंह डिजिटल एजुकेशन एवं युवा सशक्तिकरण केंद्र, डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास, युवाओं के लिए निःशुल्क डिजिटल एवं एआई कौशल प्रशिक्षण, मेधावी छात्रों को डिजिटल उपकरणों का वितरण जैसे प्रमुख पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और रोजगार अवसरों के अनुरूप सक्षम बनाना है।

*अवसर के साथ जिम्मेदारी*

डॉ. सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र एवं विश्व आर्थिक मंच के आकलन के अनुसार एआई का संभावित वैश्विक आर्थिक प्रभाव 4.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। वहीं, मैकिन्से के अनुसार वर्ष 2030 तक लगभग 400–800 मिलियन कामगारों को पुनः कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि डीपफेक और एआई-आधारित दुष्प्रचार को वैश्विक जोखिमों में शामिल किया गया है, जिससे डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नैतिक एआई ढांचा और मजबूत संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।

*दीर्घकालिक दृष्टि ही बनेगी सफलता की कुंजी*

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि एआई केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक संरचना में व्यापक बदलाव का आधार है। यदि हम समय रहते कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और जिम्मेदार नीतिगत ढांचे को प्राथमिकता दें, तो एआई समावेशी विकास, सुरक्षित प्रणाली और नए रोजगार सृजन का माध्यम बनेगी। इसके लिए उन्होंने प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि सरोजनीनगर से प्रारंभ यह प्रयास उत्तर प्रदेश और पूरे भारत तक—हम एआई को जन-जन की प्रगति का माध्यम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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