यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी
बिहार की पटना हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा है कि केवल परिसर से शराब बरामद होने के आधार पर संपत्ति सील या जब्त नहीं की जा सकती. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध शराब के भंडारण में परिसर स्वामी की प्रत्यक्ष संलिप्तता या मिलीभगत सिद्ध होना अनिवार्य है. जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने दयामंती देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जमीन से संबंधित जब्ती कार्यवाही रद्द कर दी.
मामला नवादा उत्पाद थाना कांड संख्या 873/2024 से जुड़ा है. 13 दिसंबर, 2024 को दो आरोपितों के पास से 1.500 लीटर अवैध विदेशी शराब बरामद हुई थी, साथ ही 2.625 लीटर शराब याचिकाकर्ता की घेराबंदी वाली जमीन पर कचरे में छिपी बोरी से मिली थी. जिसे प्रशासन ने सील कर जब्ती वाद शुरू कर दिया था.
प्रशासन के इसी मामले के बाद याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार अदालत में दलील दी कि न तो उन्हें अभियुक्त बनाया गया है और न ही आरोपितों से उनका संबंध है. ऐसे में जमीन को सील करना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है.
दोनों तरफ से सुनवाई के बाद पटना हाईकोर्ट को सरकारी पक्ष जमीन से जुड़ी संलिप्तता का प्रमाण पेश नहीं कर सका ऐसे में कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के संपत्ति को सील करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 300A का उल्लंघन है. अदालत ने फटकार लगाते हुए सख्त निर्देश दिए हैं.