दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति का कड़ा रुख,

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने पंजाब के शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चल रही विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही में सख्त रुख अख्तियार किया है. समिति ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक (DGP) और जालंधर के पुलिस आयुक्त को औपचारिक समन जारी किया है. इन सभी अधिकारियों को 27 फरवरी 2026 को समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है.
27 फरवरी को बैठक में जवाबों का बारीकी से परीक्षण
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह मामला नेता प्रतिपक्ष आतिशी के विरुद्ध की गई कथित टिप्पणियों और उससे जुड़े विशेषाधिकार हनन से संबंधित है. समिति ने स्पष्ट किया है कि सदन की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के प्रासंगिक नियमों के तहत यह समन जारी किए गए हैं. समिति 27 फरवरी को होने वाली बैठक में इन अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत लिखित जवाबों का बारीकी से परीक्षण करेगी.

विशेषाधिकार मामले में ‘व्यक्तिगत’ जवाबदेही तय
सचिवालय ने इस कार्यवाही के दौरान एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु को रेखांकित किया है. 13 फरवरी को जारी पत्र का हवाला देते हुए कहा गया कि विशेषाधिकार के मामले संबंधित व्यक्ति के लिए ‘व्यक्तिगत’ प्रकृति के होते हैं. अतः, इन मामलों में अधिकारियों को अपनी व्यक्तिगत क्षमता में ही उत्तर देना अनिवार्य है. समिति ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि 20 फरवरी तक लिखित उत्तर प्रस्तुत करना सामग्री साझा करने का अंतिम अवसर होगा.

विधानसभा सचिवालय में अटॉर्नी जनरल की राय पर असंतोष

विधानसभा सचिवालय में अटॉर्नी जनरल की राय पर असंतोष जताया है. समिति ने इस बात पर भी संज्ञान लिया कि पंजाब सरकार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) द्वारा दी गई राय दिल्ली विधानसभा द्वारा उठाए गए सरोकारों को पूरी तरह संबोधित नहीं करती है. हालांकि, समिति ने निर्णय लिया है कि जांच के दौरान इस राय पर विचार किया जाएगा, लेकिन इसके लिए अटॉर्नी जनरल की राय की कॉपी भी 27 फरवरी तक तलब की गई है.

कार्रवाई से दिल्ली और पंजाब की राजनीति में हलचल तेज

दिल्ली विधानसभा की इस कार्रवाई से दिल्ली और पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. समिति के कड़े रुख से यह साफ है कि वह इस मामले की तह तक जाने के लिए तैयार है. अब सबकी नजरें 27 फरवरी को होने वाली समिति की बैठक पर टिकी हैं, जहां पंजाब के इन कद्दावर अधिकारियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी. अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह-II), DGP और पुलिस आयुक्त (जालंधर) को अलग-अलग नोटिस जारी कर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है.

पंजाब पुलिस की टिप्पणियां दिल्ली विधायकों के विशेषाधिकारों का उल्लंघन
बता दें कि यह विवाद दिल्ली विधानसभा सदन के पटल पर दिए गए वक्तव्यों और उसके बाद पंजाब पुलिस द्वारा की गई कथित कार्रवाई से जुड़ा है. आरोप है कि पंजाब पुलिस की कुछ टिप्पणियां और कार्रवाइयां दिल्ली विधानसभा की गरिमा और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों का उल्लंघन करती हैं. जब कोई बाहरी शक्ति या अधिकारी सदन की कार्यवाही में बाधा डालता है या सदस्य के विरुद्ध अनुचित टिप्पणी करता है, तो उसे ‘विशेषाधिकार हनन’ माना जाता है.

विशेषाधिकार समिति ने पंजाब के अधिकारियों से उन आधारभूत दस्तावेजों की मांग की है, जिनके आधार पर कार्यवाही की गई थी. इसमें मुख्य रूप से –

1. एफआईआर का आधार बनने वाली मूल शिकायत की कॉपी

2. दर्ज की गई एफआईआर की मूल प्रति

3. संबंधित तकनीकी और फोरेंसिक रिपोर्ट, जिन पर पंजाब पुलिस ने भरोसा जताया है.

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