यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
उप संपादक संजय मिश्रा
*गोरखपुर* एम्स गोरखपुर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने एक आठ माह की गर्भवती महिला में अत्यंत दुर्लभ A3 सबग्रुप (A रक्त समूह का उपसमूह) की सफलतापूर्वक पहचान की है। मरीज को रक्त समूह में विसंगति (ब्लड ग्रुपिंग डिस्क्रेपेंसी) के मूल्यांकन के लिए विभाग में भेजा गया था।
इस उपलब्धि को संस्थान की उन्नत इम्यूनोहेमेटोलॉजी क्षमता और पूर्वांचल के लोगों को सुरक्षित व सटीक रक्त आधान सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. सौरभ मूर्ति ने बताया कि A सबग्रुप में लाल रक्त कणिकाओं की सतह पर A एंटीजन की अभिव्यक्ति सामान्य A रक्त समूह की तुलना में कम होती है। इसके कारण कई बार सामान्य रक्त समूह परीक्षण में विसंगति दिखाई देती है और सही रक्त समूह की पहचान के लिए विस्तृत सेरोलॉजिकल जांच की आवश्यकता पड़ती है।
उन्होंने बताया कि A3 सबग्रुप अत्यंत दुर्लभ माना जाता है और भारत में कुछ क्षेत्रीय अध्ययनों के अनुसार इसकी आवृत्ति लगभग 33 हजार व्यक्तियों में एक पाई जाती है। इस मरीज में एंटी-A1 एंटीबॉडी भी पाई गई, जो 4°C पर रिएक्टिव थी। यह तथ्य रक्त आधान की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एंटी-A1 की उपस्थिति में ऐसे मामलों में A समूह के PRBCs देना उचित नहीं माना जाता, बल्कि सुरक्षित रक्त आधान के लिए O समूह के PRBCs देने की सलाह दी जाती है।
इस दुर्लभ रक्त समूह की पहचान के लिए विस्तृत इम्यूनोहेमेटोलॉजिकल परीक्षण विभाग की टीम ने किया, जिसमें डॉ. मोनिशा (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. निरंजन (सीनियर रेजिडेंट) और डॉ. पर्षा (जूनियर रेजिडेंट) शामिल रहे।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही विभाग ने एक अन्य मरीज में अत्यंत दुर्लभ बॉम्बे (Oh) रक्त समूह की भी पहचान की थी, जो विश्व के सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में गिना जाता है। कम समय में दो दुर्लभ रक्त समूहों की पहचान विभाग की बढ़ती विशेषज्ञता और उन्नत जांच क्षमता को दर्शाती है।
एम्स गोरखपुर की इम्यूनोहेमेटोलॉजी प्रयोगशाला में दुर्लभ एंटीसीरा और उन्नत अभिकर्मकों की सुविधा उपलब्ध है, जिनकी मदद से एंटीबॉडी स्क्रीनिंग, एंटीबॉडी पहचान, एल्यूशन, एड्सॉर्प्शन और रक्त समूह संबंधी जटिल विसंगतियों की जांच जैसी उन्नत प्रक्रियाएं की जाती हैं। इससे दुर्लभ रक्त समूह वाले मरीजों में सटीक रक्त समूह निर्धारण और सुरक्षित रक्त आधान सुनिश्चित किया जा सकता है।
इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रयास सराहनीय हैं और संस्थान पूर्वांचल के लोगों को अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक व ट्रांसफ्यूजन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के दुर्लभ रक्त समूहों की पहचान संस्थान की उत्कृष्टता, सुरक्षा और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
एम्स गोरखपुर दुर्लभ रक्त समूहों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्नत इम्यूनोहेमेटोलॉजिकल जांच और रेयर डोनर पहचान प्रणाली को भी मजबूत कर रहा है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपयुक्त रक्त उपलब्ध कराया जा सके।