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उप संपादक संजय मिश्रा
वाराणसी। सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रशांत कुमार (फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत में सोमवार को ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के लार्ड विश्वेश्वर मूलवाद में सुनवाई हुई। इस मामले में सम्पूर्ण एएसआई सर्वे कराने की अर्जी पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने बहस पूरी कर ली। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तिथि नियत की गई है।
अगली तिथि पर विपक्षी अंजुमन इंतजामिया की ओर से बहस होगी। पिछले तारीख पर मूल वाद के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने सम्पूर्ण एएसआई सर्वे कराने सबंधित अर्जी पर बहस शुरू की थी। सोमवार को भी दलील दी गई कि स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर का शिवलिंग ज्ञानवापी के मुख्य गुम्बद के नीचे जमीन में 100 फुट तक का शिवलिंग है। जिसे मलबे से पाट दिया गया है। यही नहीं इसके पास एक कूप भी है। जिसमें से अपने आप ही गंगा का फव्वारा निकलता था और स्वंभू ज्योतिलिंग पर पड़ता था। उसको भी पाट दिया गया है। मगर उसका पानी का रिसाव आज भी जमीन के अंदर है । इसी कारण पूरा ज्ञानवापी परिसर की दीवारों पर सिलन रहती है
उक्त ज्ञानवापी सेंट्रल गुम्बद के जमीन के नीचे के एएसआई सर्वे नहीं किया गया है। कहा जाता है कि गोलकुंडे के महाराजा ने एक बार हीरे जड़ित स्वर्ण मुकुट रूप में स्वयम्भू ज्योतिलिंग को स्थापित किया था। मुस्लिम आक्रांताओं ने उक्त मंदिर पर आक्रमण किया। डर से पुजारी उसी मुकुट को लेकर ज्ञानकुप में कूद गए थे। विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर बनाते समय उसमें भी काफी संख्या में मदिर के अवशेष मिले थे।