यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ
– 44 प्रशिक्षु अधिकारियों ने देखा कचरे के पृथक्करण, खाद निर्माण और नारियल के खोल से रस्सी बनाने की प्रक्रिया
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी, लखनऊ में आयोजित 90वें आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को 44 प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने नगर निगम लखनऊ के शिवरी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का भ्रमण किया। इस अध्ययन दौरे का उद्देश्य प्रशिक्षु अधिकारियों को नगर निगम द्वारा संचालित वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली एवं आधुनिक कूड़ा निस्तारण की प्रक्रियाओं से अवगत कराना था।
भ्रमण के दौरान सफाई एवं खाद्य निरीक्षक (एसएफआई) श्री जितेंद्र वर्मा ने प्रशिक्षु अधिकारियों को शिवरी प्लांट की विभिन्न इकाइयों का विस्तृत निरीक्षण कराया। उन्होंने बताया कि शहर से डोर-टू-डोर एकत्रित होने वाले कचरे को सबसे पहले गीले और सूखे कचरे में अलग किया जाता है। इसके बाद पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग कर शेष कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
गीले कचरे से तैयार होती है जैविक खाद*
प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया गया कि प्लांट में प्राप्त गीले कचरे से वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद (कम्पोस्ट) तैयार की जाती है। यह खाद कृषि, उद्यान एवं हरित क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध होती है। इस प्रक्रिया से कचरे का प्रभावी निस्तारण होने के साथ-साथ जैविक संसाधनों का पुनः उपयोग भी सुनिश्चित किया जाता है।
*नारियल के खोल से बनाई जाती है उपयोगी रस्सियां*
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने नारियल के खोल (कॉयर) से मजबूत एवं उपयोगी रस्सियां बनाने की प्रक्रिया भी देखी। एसएफआई श्री जितेंद्र वर्मा ने बताया कि सामान्यतः अनुपयोगी समझे जाने वाले नारियल के खोल को मशीनों की सहायता से संसाधित कर उससे टिकाऊ रस्सियां एवं अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इससे अपशिष्ट का पुनर्चक्रण होने के साथ-साथ रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
*व्यावहारिक अनुभव से मिली नई सीख*
प्रशिक्षु अधिकारियों ने शिवरी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए इसे शहरी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक उत्कृष्ट मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन भ्रमण से उन्हें स्वच्छता प्रबंधन, संसाधनों के पुनर्चक्रण तथा कचरे से उपयोगी उत्पाद तैयार करने की आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई, जो भविष्य में प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन में उपयोगी सिद्ध होगी।