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* “कांग्रेस अपनी सेवा-दल परंपरा को पुनर्जीवित करे”: डॉ. राजेश्वर सिंह
लखनऊ/सरोजनीनगर — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने संघ की एक सदी से जारी निरंतर जमीनी सेवा, संगठन निर्माण और सामाजिक कार्यों को रेखांकित करते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित रहने के बजाय समाज के बीच स्थायी रूप से काम करने की सीख लेने की बात कही।
डॉ. सिंह ने कहा कि राजनीति केवल चुनाव के समय सक्रिय होने का माध्यम नहीं है। स्थायी जनाधार और जनविश्वास 365 दिन की सेवा, मजबूत संगठन और समाज के साथ निरंतर जुड़ाव से निर्मित होते हैं। RSS की एक सदी की यात्रा इसी निरंतरता का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि RSS आज लगभग 89,000 दैनिक शाखाओं के माध्यम से 55,000 से अधिक स्थानों तक पहुंच चुका है। पिछले दो-तीन वर्षों में ही 4,000 से अधिक नए स्थानों पर शाखाएं और 5,000 से अधिक नई शाखाएं जुड़ी हैं। संघ का सामाजिक कार्य केवल शाखाओं तक सीमित नहीं है।
डॉ. सिंह ने बताया कि विद्या भारती के 12,000 से अधिक विद्यालयों में करीब 30 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। एक लाख से अधिक एकल विद्यालय ऐसे क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचा रहे हैं, जहां सरकारी विद्यालय उपलब्ध नहीं हैं। राष्ट्रीय सेवा भारती के 5,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र सेवा कार्य कर रहे हैं। वनवासी कल्याण आश्रम सात दशकों से जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत है। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के करीब 75 लाख सदस्य हैं।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “नकारात्मक राजनीति कोई रणनीति नहीं है — कभी रही भी नहीं। किसी विचारधारा का विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन केवल विरोध के आधार पर राजनीति को लंबे समय तक मजबूत नहीं किया जा सकता। समाज के बीच जाकर काम करना, संस्थाएं बनाना और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही स्थायी जनविश्वास की नींव है।”
उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां RSS का राजनीतिक प्रभाव सीमित होने के बावजूद देश में दूसरी सबसे अधिक शाखाएं हैं। उन्होंने कहा, “यह केवल वोट मशीन नहीं है, यह एक मजबूत सामाजिक और संगठनात्मक संरचना है, जो चुनावी गणित से परे लगातार काम करती है।”
डॉ. सिंह ने कांग्रेस की स्वयंसेवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वयंसेवक आधारित संगठन की अवधारणा कांग्रेस से भी जुड़ी रही है। 1923 में काकीनाडा में हिंदुस्तानी सेवा दल की पहल हुई थी और 1931 में महात्मा गांधी ने इसे मान्यता दी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी इस सेवा-दल परंपरा को पुनर्जीवित करना चाहिए और उसे केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस और विपक्ष के पास देश के सामने एक स्पष्ट विकल्प है—हर समय आलोचना करने के बजाय समाज में संस्थाएं खड़ी करें, युवाओं के साथ काम करें, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान दें और जरूरतमंदों की सेवा करें। यही वह काम है जो राजनीतिक दलों को समाज से स्थायी रूप से जोड़ता है।”
डॉ. सिंह ने कांशीराम द्वारा BAMCEF और DS-4 जैसे संगठनों के निर्माण का भी उल्लेख किया और कहा कि मजबूत कैडर और सामाजिक संगठन किसी भी राजनीतिक आंदोलन की दीर्घकालीन ताकत बन सकते हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी से भी सवाल किया कि सरकार से बाहर, अपने संसाधनों से संचालित और ऐसे लोगों की सेवा करने वाली कितनी सामाजिक संस्थाएं उसके पास हैं, जो शायद कभी उसे वोट न दें।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में केवल आलोचना पर्याप्त नहीं है। “एक स्कूल का कोई ऑफ स्विच नहीं होता। वह चुनाव आने पर शुरू और चुनाव खत्म होने पर बंद नहीं होता। RSS ने सौ वर्षों तक इसी निरंतरता के साथ काम किया है। विपक्ष को भी इससे सीखना चाहिए—सेवा निरंतर हो, संगठन मजबूत हो और राजनीति समाज निर्माण का माध्यम बने।”